बिहार की राजनीति में अपने बेबाक अंदाज़ के लिए पहचाने जाने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि समाजवाद, धर्म और पारिवारिक रिश्तों को लेकर खींची गई वह लकीर है, जिसने उत्तर प्रदेश से बिहार तक राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक यूट्यूब इंटरव्यू में तेज प्रताप ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर खुलकर निशाना साधा और बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन के बहाने समाजवादी राजनीति की मौजूदा दिशा पर सवाल उठा दिए।
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तेज प्रताप यादव ने खुद को धार्मिक बताते हुए कहा कि सच्चा धर्म वही है जो समाज को जोड़ने का काम करे, न कि उसे तोड़ने का। बागेश्वर बाबा की कथित धर्म यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर धीरेंद्र शास्त्री उन्हें ऐसी किसी पदयात्रा में शामिल होने का निमंत्रण देते हैं तो वे जरूर जाएंगे। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में केवल धार्मिक समर्थन नहीं, बल्कि समाजवादी राजनीति के भीतर बदलते विमर्श के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जहां धर्म और राजनीति के रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है।
इंटरव्यू के दौरान तेज प्रताप ने अखिलेश यादव द्वारा धीरेंद्र शास्त्री पर कथा के लिए करोड़ों रुपये लेने के आरोप का भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने पलटवार करते हुए सवाल किया कि आखिर अखिलेश यादव के पास खुद इतना पैसा कहां से आता है। तेज प्रताप ने अखिलेश के कथित लाइफस्टाइल, महंगी गाड़ियों और हेलीकॉप्टर यात्राओं का जिक्र करते हुए तंज कसा और ‘टोटी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पूरे मामले को सियासी व्यंग्य में बदल दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और समर्थक-विरोधी दोनों खेमों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
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तेज प्रताप यादव ने अपने और अखिलेश यादव के बिगड़ते रिश्तों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पहले दोनों के बीच वीडियो कॉल पर बातचीत होती थी, लेकिन चुनाव के दौरान हुए कथित अपमान के बाद अब संवाद की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उनका साफ कहना था कि राजनीति में सम्मान सबसे बड़ी शर्त है और जहां सम्मान नहीं, वहां संबंध भी नहीं टिकते। महागठबंधन के चुनाव प्रचार में शामिल न होने के सवाल पर उन्होंने तर्क दिया कि अखिलेश यादव स्वयं महागठबंधन का हिस्सा थे, इसलिए उनके प्रचार में जाने का सवाल ही नहीं उठता।
पारिवारिक रिश्तों और समाजवादी विरासत पर बोलते हुए तेज प्रताप ने स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को सबसे बड़ा समाजवादी नेता बताया और कहा कि उनके जैसा नेता दोबारा पैदा नहीं हुआ। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और शरद यादव जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने समाजवादी नेताओं की सोच और आज के नेताओं की राजनीति में फर्क साफ नजर आता है। तेज प्रताप के मुताबिक, मौजूदा दौर में समाजवाद का मतलब और उसकी दिशा दोनों बदल रही हैं, और यही बदलाव सियासत में नए टकराव की वजह बन रहे हैं।






















