बिहार विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन राजनीतिक तापमान उस समय तेज हो गया जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने बिहार सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था को निशाने पर लेते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से राज्यपाल के अभिभाषण की भाषा और मुद्दे लगभग एक जैसे ही रहे हैं, जिससे सरकार की नीतियों में ठहराव का संकेत मिलता है।
सदन में बोलते हुए तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बीते 11 वर्षों में कई राज्यपाल बदले, लेकिन अभिभाषण की सामग्री में खास बदलाव देखने को नहीं मिला। उनके अनुसार हर बार वही योजनाएं और उपलब्धियां दोहराई जाती हैं, जबकि जमीन पर हालात अलग कहानी बयान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का भाषण अधिकारियों द्वारा तैयार किया जाता है, लेकिन बिहार की वास्तविक स्थिति से जनता और सत्ता पक्ष के लोग भी भली-भांति परिचित हैं।
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नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की पहचान बताते हुए कहा कि इसकी दो प्रमुख छवियां बन चुकी हैं—एक झूठी वाहवाही और दूसरी “100 प्रतिशत लापरवाही”। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने कामों का प्रचार तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। तेजस्वी यादव के इस बयान पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा के दौरान माहौल और गरमा गया। तेजस्वी यादव ने महिलाओं से जुड़े अपराधों और सामाजिक घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष की महिला विधायकों ने विरोध दर्ज कराया और सदन में कुछ देर के लिए शोरगुल की स्थिति बन गई। विपक्ष का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया।
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इसके अलावा उन्होंने हाल के चुनावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार में “लोक हारा और तंत्र जीता”, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को धनतंत्र और मशीन आधारित व्यवस्था में बदल दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के विकास के लिए जब भी सरकार को सहयोग की जरूरत होगी, विपक्ष सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।






















