बिहार की राजनीति में बजट सत्र से पहले हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने शनिवार को पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाकर साफ संकेत दे दिया कि राष्ट्रीय जनता दल अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। इस बैठक में पार्टी के विधायक, विधान पार्षद, सांसद और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव की यह पहली बड़ी राजनीतिक सक्रियता मानी जा रही है, जिसे संगठन के भीतर “री-स्टार्ट मोड” के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक का फोकस सिर्फ आगामी बजट सत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश भी साफ नजर आई। संगठन की मजबूती, जमीनी स्तर पर विस्तार और बिहार के मौजूदा राजनीतिक हालात पर गहन चर्चा हुई। तेजस्वी यादव ने नेताओं से खुलकर फीडबैक लिया और संकेत दिए कि संगठनात्मक ढांचे में जरूरी बदलाव जल्द ही सामने आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे बिहार के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर सीधे कार्यकर्ताओं और जनता से संवाद स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं।
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बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा। महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक न्याय और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष का रास्ता अपनाने की तैयारी में है। बजट सत्र के दौरान विपक्ष की भूमिका को और धारदार बनाने के लिए रणनीति बनाई गई है ताकि सरकार पर लगातार दबाव बनाया जा सके। हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार की गहन समीक्षा भी बैठक का अहम हिस्सा रही, जिसमें संगठनात्मक कमजोरियों और चुनावी रणनीति की खामियों पर खुलकर चर्चा हुई।
तेजस्वी यादव की सक्रियता का एक अहम संकेत यह भी है कि उन्होंने हाल के दिनों में लगातार बैठकें की हैं। शनिवार की बैठक से पहले उन्होंने पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के साथ भी मंथन किया था। इसका साफ संदेश है कि पार्टी नेतृत्व अब सभी मोर्चों पर समन्वित रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहता है। चुनावी नतीजों के बाद विदेश यात्रा को लेकर सत्तापक्ष के हमलों के बीच तेजस्वी की यह वापसी राजनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को बड़ा झटका लगा था और पार्टी सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई थी। तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा थे, इसलिए हार की जिम्मेदारी भी सीधे उन्हीं पर आई। चुनाव के बाद वे परिवार के साथ विदेश चले गए थे, जिस पर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए। लेकिन अब लौटकर जिस तरह से उन्होंने बैठकों का सिलसिला शुरू किया है, उससे यह संकेत मिल रहा है कि वे हार से सबक लेकर नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करना चाहते हैं। बैठक के बाद पार्टी के प्रधान महासचिव एवं विधायक रणविजय साहू ने मीडिया से बातचीत में भी यही संकेत दिया कि आने वाले दिनों में राजद की राजनीति ज्यादा सक्रिय और आक्रामक दिखेगी।






















