Tejashwi Yadav Republic Day: पटना में गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के भीतर एक दिलचस्प राजनीतिक संकेत देखने को मिला। पार्टी के नए कार्यकारी अध्यक्ष बने तेजस्वी यादव इस बार 26 जनवरी के सार्वजनिक कार्यक्रमों से पूरी तरह अनुपस्थित रहे। न तो वे राबड़ी आवास पर नजर आए और न ही राजद कार्यालय या अपने सरकारी आवास पर झंडारोहण करते दिखे। उनकी गैरमौजूदगी में राजद के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने खुद मोर्चा संभालते हुए राबड़ी आवास और तेजस्वी यादव के आवास पर तिरंगा फहराया। राजद के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी किए गए वीडियो और तस्वीरों में भी तेजस्वी यादव कहीं दिखाई नहीं दिए, जिससे राजनीतिक हलकों में इस अनुपस्थिति को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
राजनीतिक दृष्टि से यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है और उन्हें भविष्य का चेहरा माना जा रहा है। ऐसे समय में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उनका सामने न आना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा रही कि क्या यह महज संयोग था या फिर इसके पीछे कोई रणनीतिक संदेश छिपा है। वहीं दूसरी ओर लालू यादव का खुद झंडा फहराना यह बताने के लिए काफी माना गया कि राजद में आज भी अंतिम शब्द उन्हीं का है।
हालांकि तेजस्वी यादव ने अपनी अनुपस्थिति को पूरी तरह चुप्पी में नहीं बदला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए देश और बिहार की जनता को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओं और शहीदों को याद करते हुए लिखा कि यह दिन उन सभी वीरों के बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने देश को आजादी दिलाई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया। उन्होंने संविधान की मूल भावना को बचाने की बात कही और देश की एकता-अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में केवल शुभकामनाएं ही नहीं दीं बल्कि केंद्र की एनडीए सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की सामाजिक, आर्थिक और संविधान विरोधी नीतियों के कारण देश के हालात चिंताजनक हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों बाद भी संविधान को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर किया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार हो रहा है। तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि वे ताकतें, जिनका आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा, आज संविधान की उद्देशिका को बदलने का प्रयास कर रही हैं।
उनके बयान ने यह साफ कर दिया कि भले ही वे झंडारोहण के कार्यक्रम में नजर न आए हों, लेकिन राजनीतिक रूप से वे पूरी तरह सक्रिय हैं और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। इसके बावजूद पार्टी के भीतर और बाहर यह सवाल बना रहा कि एक नए कार्यकारी अध्यक्ष का सार्वजनिक रूप से गायब रहना क्या राजद की आंतरिक राजनीति का संकेत है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि हाल के दिनों में तेजस्वी यादव लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर हमलावर रहे हैं और खुद को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत विपक्षी चेहरे के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उनका गणतंत्र दिवस संदेश भी केवल शुभकामना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी का मंच बन गया। इससे यह संकेत मिलता है कि तेजस्वी यादव की राजनीति अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श में अपनी जगह बनाना चाहती है।






















