करीब डेढ़ महीने की अनुपस्थिति के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) रविवार को पटना लौट आए। उनके साथ पत्नी राजश्री और दोनों बच्चे भी मौजूद रहे। एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं की भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया। मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादब ने सबसे पहले सबको नव वर्ष की बधाई दी। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि लोक की हार हुई है और तन्त्र जीत गया है। इस चुनाव को धनतंत्र और मशीन तंत्र बना दिया गया है। छाल कपट से ये लोग चुनाव जीते हैं। नई सरकार कैसे बनी है यह पूरा देश और बिहार की जनता जानती है।
उन्होंने कहा कि हम लोग सकारात्मक राजनीति करते हैं इसलिए मौजूदा सरकार के सौ दिन तक के काम पर कुछ नहीं बोलेंगे। और सौ दिन तक देखेंगे कि यह सरकार हमारी माताओं-बहनों को क्या दे रही है। एक करोड़ नौजवान को नौकरी कब मिलेगी, हर जिले में कारखाने लगाने की बात कही गई है, लगते हैं कि नहीं लगते हैं, सौ दिन तक हम कुछ नहीं बोलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो घोषणा पत्र में वायदे किये हैं, उसे पूरा करे। अपराध के सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि हम सौ दिन तक कुछ नहीं बोलेंगे।
खरमास बाद बदलेगा लालू परिवार का ठिकाना.. पटना पहुंचते ही राजद सुप्रीमो देखने लगे नया घर
दरअसल, तेजस्वी यादव की यह वापसी परिस्थिति के बेहद उलझे हुए दौर में हो रही है। एक ओर परिवार के भीतर हालिया तनाव ने आरजेडी को असहज कर दिया है, वहीं दूसरी ओर राजनीति और कानूनी मोर्चे पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। तेजप्रताप यादव और रोहिणी आचार्या द्वारा सार्वजनिक बयानबाजी ने घर की कलह खुले मंच पर ला दी है। साथ ही दिल्ली की अदालत ने ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव समेत परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं, जिससे कानूनी दबाव और बढ़ गया है।
राजनीतिक ज़मीनी सच्चाई भी आरजेडी के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं रही। हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी को उम्मीदों के विपरीत झटका लगा। अगर एक सीट और कम आती तो तेजस्वी नेता प्रतिपक्ष बनने से चूक जाते। उधर, महागठबंधन की सहयोगी कांग्रेस अब ‘एकला चलो’ की तर्ज पर अपनी राह अलग तलाशती दिख रही है। परिणामस्वरूप तेजस्वी यादव ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां परिवार और पार्टी दोनों अस्थिर दिख रहे हैं और नेतृत्व के सामने मुश्किलें कई गुना बढ़ चुकी हैं।






















