Tejashwi Yadav Return: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। चुनावी नतीजों के तुरंत बाद उनका विदेश जाना और विधानसभा की कार्यवाही से दूरी सत्ता पक्ष को हमलावर बनने का मौका दे गई। पोस्टर लगाए गए, बयान दिए गए और यहां तक कहा गया कि नेता प्रतिपक्ष “लापता” हैं। लेकिन अब सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजस्वी यादव विदेश दौरे से वापस लौट आए हैं और इसी सप्ताह से बिहार की राजनीति में फिर से पूरी तरह सक्रिय होने जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव की वापसी को आरजेडी के लिए एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब पार्टी के भीतर बड़े और सख्त फैसले लिए जा सकते हैं। जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चुनाव के दौरान सवाल उठे थे, उनकी जिम्मेदारी बदली जा सकती है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि पार्टी ने चुनाव में भीतरघात करने वालों की पहचान कर ली है और आने वाले दिनों में उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मकर संक्रांति के बाद तेजस्वी यादव बिहार के दौरे पर निकल सकते हैं। इस यात्रा का मकसद सिर्फ राजनीतिक सक्रियता दिखाना नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी हकीकत को समझना और बूथ स्तर तक पार्टी को फिर से खड़ा करना है। खास बात यह है कि आरजेडी की नजर अब पंचायत चुनाव पर भी टिकी है। भले ही पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते, लेकिन बिहार की राजनीति में यह किसी से छिपा नहीं है कि इन चुनावों का असर सीधे विधानसभा और लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करता है।
आरजेडी नेतृत्व मानता है कि पंचायत चुनाव के जरिए कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया जा सकता है और गांव-गांव तक पार्टी की पकड़ मजबूत की जा सकती है। इसी रणनीति के तहत तेजस्वी यादव संगठनात्मक समीक्षा बैठकों की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी हार की समीक्षा, संगठन की कमजोर कड़ियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन होगा।
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने आरजेडी को बड़ा झटका दिया था। महागठबंधन जहां सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया, वहीं आरजेडी महज 25 सीटें ही जीत सकी। इस हार के बाद तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता, उनकी सक्रियता और मैदान में मौजूदगी को लेकर विपक्ष ही नहीं, पार्टी के भीतर भी सवाल उठने लगे। जेडीयू लगातार उनके विदेश दौरे को मुद्दा बना रहा है।
तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी चुनौती अब अपनी छवि को लेकर है। विधानसभा सत्र के दौरान गैरहाजिरी और आपदा के वक्त बिहार से बाहर रहने की बातें उनके खिलाफ नैरेटिव बनाने में इस्तेमाल हुई हैं। ऐसे में विदेश से लौटने के बाद उनके सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक तरफ पार्टी संगठन को पटरी पर लाना और दूसरी तरफ नीतीश सरकार के खिलाफ ऐसा ठोस मुद्दा खड़ा करना, जिससे विपक्ष की राजनीति को धार मिले।
अब जब तेजस्वी यादव वापस आ चुके हैं, तो साफ है कि उनकी हर गतिविधि पर सत्ता पक्ष और जनता दोनों की नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आने वाले दिनों में आरजेडी में कितने बड़े बदलाव करते हैं, भीतरघातियों पर कितना सख्त रुख अपनाते हैं और किस मुद्दे को लेकर नीतीश सरकार को घेरते हैं।






















