राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति में एक अहम अध्याय तब जुड़ गया, जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। लालू प्रसाद यादव के हाथों नियुक्ति पत्र मिलते ही तेजस्वी ने जिस तेवर में अपनी बात रखी, उसने साफ कर दिया कि यह महज औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संगठन को नए सिरे से कसने की शुरुआत है। उनका बयान केवल नेताओं या कार्यकर्ताओं के लिए चेतावनी नहीं था, बल्कि यह आने वाले राजनीतिक संघर्षों का संकेत भी था।
तेजस्वी यादव ने दो टूक कहा कि वे किसी के आगे झुकने वाले नहीं हैं और न ही पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब यह नहीं चलेगा कि कौन पार्टी में क्यों है या कौन किसे पसंद नहीं करता। पार्टी की मजबूती व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से ऊपर है और अगर राजद को आगे बढ़ना है तो सभी को एकजुट होकर पार्टी के लिए काम करना होगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद यादव और उनकी विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि राजद की राजनीति कभी झुकी है और न ही झुकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी के चरणों में गिरने की राजनीति नहीं करेंगे और झुकने की बजाय संघर्ष करना पसंद करेंगे। इस बयान के जरिए उन्होंने साफ कर दिया कि राजद की राजनीति सत्ता की सौदेबाजी से नहीं, बल्कि विचारधारा से संचालित होगी। उनके अनुसार पार्टी की असली ताकत उसकी एकता है और आपसी मतभेद केवल नुकसान पहुंचाते हैं।
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए तेजस्वी यादव ने बताया कि वे करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन संगठन में औपचारिक जिम्मेदारी उन्हें अब जाकर मिली है। उन्होंने 2010 के दौर को याद किया, जब उनकी भूमिका बेहद सीमित थी और वे पार्टी कार्यालय में माहौल को समझने तक ही सीमित रहते थे। उस समय कई प्रत्याशी प्रचार के लिए बुलाते जरूर थे, लेकिन उनकी भूमिका बहुत छोटी थी। बाद के वर्षों में वे विधायक दल के नेता बने, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारी उनसे दूर ही रही।
तेजस्वी यादव ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें यह जिम्मेदारी बेहद कठिन समय में मिली है। उन्होंने इसे कांटों भरा रास्ता बताते हुए कहा कि अपनों को जोड़ते हुए मंजिल तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है। आज की राजनीति में विचारधारा कमजोर और सत्ता की राजनीति मजबूत होती जा रही है। ऐसे माहौल में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसी राजद की मूल सोच को जीवित रखना आसान नहीं है, लेकिन यही पार्टी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आना-जाना, टूटना-जुड़ना आज की राजनीति का हिस्सा बन चुका है, लेकिन विचार की राजनीति करने वाली पार्टियां लगातार कम होती जा रही हैं। ऐसे में राजद को सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा को बचाने की भी लड़ाई लड़नी होगी। तेजस्वी यादव का यह संदेश साफ है कि आने वाले समय में पार्टी के भीतर अनुशासन, एकता और वैचारिक स्पष्टता ही राजद की राजनीति की दिशा तय करेगी।






















