राष्ट्रीय जनता दल ने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला लेते हुए तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला सिर्फ पदभार परिवर्तन नहीं, बल्कि राजद के भीतर नेतृत्व के क्रमिक हस्तांतरण और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। नियुक्ति के बाद तेजस्वी यादव शनिवार को पहली बार पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यालय परिसर में उत्साह और उम्मीद का माहौल नजर आया, जिसने यह संकेत दिया कि पार्टी अब नए सिरे से अपनी संगठनात्मक ताकत को धार देने की तैयारी में है।
राजद कार्यालय में तेजस्वी यादव का जबरदस्त स्वागत.. कार्यकर्ताओं में उत्साह
राजद कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से नई जिम्मेदारी सौंपी गई। समर्थकों द्वारा चांदी का मुकुट पहनाया जाना इस बदलाव को प्रतीकात्मक रूप से रेखांकित करता है, जिसे पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के ऐतिहासिक क्षण के तौर पर देखा जा रहा है। इस फैसले के साथ ही राजद की कमान अब औपचारिक रूप से लालू प्रसाद यादव की दूसरी पीढ़ी के हाथों में आ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी को युवा नेतृत्व के माध्यम से नए वोटर वर्ग से जोड़ने और संगठन को आधुनिक राजनीतिक चुनौतियों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद वे इसे पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव ने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया, उसी तरह वे भी पार्टी की वैचारिक जमीन से पीछे नहीं हटेंगे। तेजस्वी यादव ने मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार तंत्र की चोरी से बनी है और इसके खिलाफ राजद लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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अपने संबोधन में तेजस्वी यादव ने बिहार में बढ़ते अपराध के मुद्दे को उठाया और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। साथ ही उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजद ने सत्ता में रहते हुए सामाजिक न्याय और विकास से जुड़े कई फैसले लिए थे, जिनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई दिया। पार्टी के भीतर इस नियुक्ति को संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।






















