बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार ने राष्ट्रीय जनता दल को आत्ममंथन के मोड़ पर ला खड़ा किया है। इस हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अब पूरी तरह ऐक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। पार्टी को दोबारा मजबूत करने और जमीनी स्तर पर धार देने के लिए तेजस्वी यादव ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला किया है। इसके तहत आरजेडी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाने की तैयारी है, जिसकी शुरुआत प्रदेश से लेकर जिला और प्रखंड स्तर तक की सभी कमिटियों को भंग करने से होगी। इसके बाद नए सिरे से संगठन का पुनर्गठन किया जाएगा, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।
तेजस्वी यादव ने हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी बैठक कर चुनावी हार के कारणों की समीक्षा की। बैठक में यह साफ हुआ कि संगठन की कमजोरी, अनुशासनहीनता और आंतरिक गुटबाजी ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। इसी के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि अब आरजेडी में सिर्फ नाम के पदाधिकारी नहीं बल्कि सक्रिय और जवाबदेह नेताओं को ही जिम्मेदारी दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व मानता है कि अगर संगठन मजबूत होगा, तभी सड़क से लेकर सदन तक प्रभावी राजनीति संभव हो पाएगी।
सूत्रों के मुताबिक आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भी बदलाव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि पार्टी की कमान किसी युवा और ऊर्जावान नेता को सौंपी जा सकती है, ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो। इस फैसले पर 25 जनवरी को प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में औपचारिक मुहर लग सकती है। यह कदम आरजेडी को भविष्य की राजनीति के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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संगठनात्मक बदलाव के साथ-साथ पार्टी अनुशासन को लेकर भी सख्त रुख अपनाने जा रही है। चुनाव के ठीक पहले पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं की एक सूची पहले ही तेजस्वी यादव को सौंपी जा चुकी है। बताया जा रहा है कि करीब 300 ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान की गई है, जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर काम किया या विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। इन सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी है और जल्द ही इन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
इतना ही नहीं, पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में भी अनुशासनहीनता को लेकर सख्ती बढ़ेगी। पार्टी कार्यालय में अकारण बैठने और संगठनात्मक कामकाज में बाधा डालने वालों पर नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया पर पार्टी विरोधी पोस्ट करने वाले लगभग तीन दर्जन नेताओं को भी चिह्नित किया गया है। पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि अब संगठन विरोधी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी।
तेजस्वी यादव पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वे आम कार्यकर्ताओं और जनता से सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं रहते। इस छवि को बदलने के लिए उन्होंने खुद पटना स्थित प्रदेश आरजेडी कार्यालय में नियमित रूप से बैठने का फैसला किया है। वे पार्टी की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर खुद नजर रखेंगे और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। आरजेडी का मानना है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार के करीब एक करोड़ 90 लाख मतदाताओं ने पार्टी और महागठबंधन पर भरोसा जताया है। ऐसे में जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए अब पार्टी जनहित के मुद्दों पर और अधिक आक्रामक रुख अपनाएगी। आने वाले दिनों में आरजेडी सड़क से लेकर सदन तक जनता की आवाज को मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम करेगी।






















