रोप दौरे से लौटने के बाद बिहार की राजनीति के केंद्र में एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav Uttarakhand) का नाम तेजी से चर्चा में है। करीब एक माह तक विदेश में रहने के बाद तेजस्वी रविवार को दिल्ली पहुंचे और सबसे पहले अपने पिता व आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। इसके बाद सोमवार को उन्होंने अचानक उत्तराखंड की ओर रुख किया जहां वे अपने करीबी मित्र शारिक उल बारी के विवाह समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक गलियारों में इस यात्रा को भले ही निजी कार्यक्रम बताया जा रहा हो, लेकिन सियासी हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हैं।
दिलचस्प बात यह है कि तेजस्वी पटना आने से पहले लगातार दिल्ली और उत्तराखंड में सक्रिय दिखे हैं। बताया गया कि उत्तराखंड दौरे में उनके साथ राघोपुर के विधायक ओसामा शहाब भी मौजूद थे। विवाह समारोह में शामिल होकर तेजस्वी ने नवदंपति को शुभकामनाएं दीं और थोड़ी देर बाद ही वापस लौट गए, लेकिन उनकी इस यात्रा के मायने पटना की राजनीति में तेजी से तौले जा रहे हैं। चुनावी हार के बाद शांत दिखाई देने वाले तेजस्वी अब एक बार फिर एक्टिव मोड में आते दिख रहे हैं और उनकी गतिविधियों पर विरोधी दलों की भी पैनी नजर है।
तेजस्वी की रणनीति को लेकर सूत्रों का दावा है कि 10 जनवरी को पटना पहुंचने के बाद वे कई बड़े फैसले ले सकते हैं। खरमास समाप्त होते ही वे बिहार यात्रा पर निकलेंगे और जनता से सीधा संवाद करेंगे। संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल की भी तैयारी बताई जा रही है। ऐसे में विदेश यात्रा के बाद तेजस्वी की दो तेज मुलाकातों ने इस बात को और मजबूत कर दिया है कि अगले कुछ दिनों में बिहार की राजनीति में कई अहम घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।






















