बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट पर अब खुली सियासी शतरंज चल रही है। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए मजबूत स्थिति में है, जहां चार सीटें लगभग पक्की मानी जा रही हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए असली जंग तेजस्वी यादव vs नीतीश-सम्राट के बीच छिड़ गई है।16 मार्च 2026 को राज्यसभा की पांच रिक्त सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिनमें मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना होगी। निर्वाचन आयोग ने 18 फरवरी को इसकी घोषणा की थी, जबकि नामांकन 26 फरवरी से शुरू होकर 5 मार्च तक दाखिल किए जा सकेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि 9 मार्च है।
तेजस्वी यादव महागठबंधन को एकजुट कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में हैं, लेकिन AIMIM (ओवैसी) ने अपना कैंडिडेट उतारकर खेल बिगाड़ दिया है।ऐसे में तेजस्वी को AIMIM के 5 विधायकों और BSP जैसे छोटे दलों के समर्थन की सख्त जरूरत है—वरना एनडीए क्लीन स्वीप कर सकता है।आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा है। 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद RJD का संगठन कमजोर हुआ है। अगर महागठबंधन पांचवीं सीट भी गंवा देता है, तो राज्यसभा में RJD की मौजूदगी खत्म हो सकती है (वर्तमान में RJD के पास 5 सीटें हैं, लेकिन ये रिटायर हो रही हैं)। तेजस्वी को गठबंधन को एकजुट रखने, AIMIM से बातचीत करने और रणनीति बनाने की चुनौती है।
पिछले दिनों बैकग्राउंड में गुप्त बातचीत तेज हो गई है। एनडीए पांचवीं सीट पर भी दबाव बनाने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष प्रतिष्ठा बचाने के लिए जुटा है। यह चुनाव बिहार की बदलती सियासी तस्वीर को और साफ करेगा—क्या एनडीए का दबदबा जारी रहेगा या विपक्ष कोई करिश्मा दिखा पाएगा?






















