UGC Bill को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने फेसबुक लाइव के माध्यम से सरकार, सियासी नेतृत्व और कुछ धार्मिक बाबाओं पर तीखा प्रहार करते हुए बहस को नए कोण से सामने रखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ तथाकथित संत गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ बयान देकर समाज में नफरत का ज़हर घोल रहे हैं। पप्पू यादव के मुताबिक, ज्ञान और धर्म के नाम पर डर फैलाने की यह प्रवृत्ति लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा है।
पप्पू यादव ने एक कथित बाबा के बयान का ज़िक्र करते हुए कहा कि उसने इच्छामृत्यु जैसी असंवेदनशील बात कही, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने ऐसे लोगों को कर्मकांडी बताते हुए आरोप लगाया कि ये स्वयं को संत बताकर हिंदू राष्ट्र की बातें करते हैं और समाज से चरण वंदना की अपेक्षा रखते हैं। सांसद का कहना था कि धर्म का इस्तेमाल सत्ता और प्रभाव के लिए करना समाज को गुमराह करने जैसा है और ऐसे लोगों को अपने शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
उन्होंने आगे दावा किया कि ज्ञान बांटने का दिखावा करने वाले कुछ बाबा असल में अरबपति बन चुके हैं और उनके ऊपर गंभीर आरोप भी हैं। पप्पू यादव ने सख्त लहजे में कहा कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनी तो ऐसे कथित संतों पर कड़ी कार्रवाई होगी। यह बयान जहां समर्थकों में तालियों का कारण बना, वहीं राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया का विषय भी बन गया।
UGC बिल से जुड़े विवाद में यह बयान ऐसे समय आया है जब अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कानून वापस लेने या इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की थी। पप्पू यादव ने इस पत्र और उससे जुड़ी बयानबाजी को सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला करार दिया और कहा कि कानूनों पर असहमति लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए, न कि भावनात्मक दबाव या भड़काऊ भाषा के जरिए।
हिंदू राष्ट्र के नाम पर नफरत फैलाने के आरोप को दोहराते हुए पप्पू यादव ने कहा कि कुछ लोग खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़काने जैसी बातें करते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में यह भी कहा कि अगर ये बाबा इतने ही चमत्कारी हैं तो पाकिस्तान को फूंक कर दिखाएं।






















