पटना में सोमवार को उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे ने बड़ा सियासी और सामाजिक रूप ले लिया, जब UGC के नए नियमों को लागू करने की मांग को लेकर हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में UGC बिल के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाए जाने के बाद यह प्रदर्शन और तेज हो गया है। छात्र इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सरकार और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती से जूझता नजर आया।
पटना कॉलेज से गांधी मैदान तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे छात्रों को जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने रोक दिया। यहां पहले से बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन छात्रों का गुस्सा देखते ही देखते उग्र हो गया। कई छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे और कुछ ही देर में बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस को वाटर कैनन की गाड़ी मंगानी पड़ी और इलाके में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।
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गांधी मैदान और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल और जिला प्रशासन की टीमें तैनात कर दी गईं, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। छात्रों को लगातार लौटने की अपील की जाती रही, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। नारेबाजी और मार्च के जरिए छात्र यह संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि UGC के नए नियम उनके भविष्य से सीधे जुड़े हैं और इसमें किसी तरह की ढील उन्हें मंजूर नहीं।
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता मनीष यादव का बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि वह “सर पर कफन बांधकर” आंदोलन में उतरे हैं और सरकार को नए नियम हर हाल में लागू करने होंगे। उनके इस बयान ने प्रदर्शन को और अधिक भावनात्मक और राजनीतिक रंग दे दिया।

गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भेदभाव रोकने से जुड़े UGC के नए नियमों पर रोक लगाई थी। कोर्ट का कहना था कि नियमों के कुछ प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले UGC के 2012 के नियमों में बदलाव के बाद 13 जनवरी 2026 को यह नया ढांचा जारी किया गया था।






















