सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत (Umar Khalid Bail) याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस फैसले को लेकर कर्नाटक के प्रभावशाली कांग्रेस नेता और मंत्री प्रियांक खरगे ने देश की न्याय व्यवस्था पर सीधा और तीखा तंज कसा है। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत’ की कथित तस्वीर बताते हुए सवाल उठाया कि क्या आज का भारत वही है, जहां अपनी बात रखने वालों को सलाखों के पीछे रखा जाता है और गंभीर अपराधों के आरोपियों को राहत मिल जाती है।
प्रियांक खरगे, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र भी हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि आज के भारत में न्याय का पैमाना चिंताजनक होता जा रहा है। उनके अनुसार यह वह दौर है, जहां सत्ता से सवाल करने वालों को जेल में डाल दिया जाता है, जबकि रेप जैसे जघन्य अपराधों के आरोपी बेल पर बाहर नजर आते हैं। उनका बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि मौजूदा न्यायिक प्रक्रिया पर उठाया गया बड़ा सवाल माना जा रहा है।
उन्होंने अपने पोस्ट में कई हाई-प्रोफाइल मामलों का उल्लेख करते हुए तुलना की और लिखा कि कुलदीप सिंह सेंगर, आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम सिंह और बृज भूषण शरण सिंह जैसे नामों को जमानत मिली, जबकि उमर खालिद, सोनम वांगचुक, सागर गोरखे और रमेश गाइचोर जैसे लोग जेल में हैं। इस तुलना के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि न्याय का तराजू बराबरी से नहीं झुक रहा है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत का मानना रहा कि मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए उन्हें राहत देना फिलहाल उचित नहीं है। हालांकि इसी केस में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई है, जिससे फैसले पर बहस और तेज हो गई है।
कानूनी जानकारों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानून और तथ्यों के आधार पर है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यूएपीए जैसे कठोर कानूनों का इस्तेमाल चुनिंदा लोगों को लंबे समय तक जेल में रखने के लिए किया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इन आरोपों को खारिज करता रहा है।





















