Umar Khalid Interim Bail: दिल्ली दंगों के आरोपी और जेएनयू के पूर्व शोधार्थी उमर खालिद को करीब चार साल बाद पहली बार इतनी लम्बी अवधि की राहत मिली है। कड़कड़डूमा अदालत ने उनकी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत मंजूर की है। यह फैसला उस समय आया है जब उनकी नियमित जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित है और भविष्य में इस मामले पर उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय की उम्मीद जताई जा रही है। अदालत की यह अनुमति व्यक्तिगत जरूरतों और न्यायिक प्रक्रियाओं के संतुलन का एक उदाहरण भी मानी जा रही है।
अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए अदालत ने साफ किया कि यह राहत केवल पारिवारिक कारणों से दी जा रही है और इसमें सख्त निगरानी शर्तें लागू रहेंगी। तय आदेश के अनुसार, खालिद को 20,000 रुपये की निजी जमानत राशि जमा करनी होगी और दो लोगों की समान रक़म की गारंटी भी देनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अवधि के दौरान खालिद किसी गवाह, केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति या जांच से संबंधित किसी तत्व के संपर्क में नहीं आ सकते।
फोन और डिजिटल गतिविधियों को लेकर भी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। खालिद को अपना सक्रिय मोबाइल नंबर जांच अधिकारी के पास जमा कराना होगा और यह फोन पूरी अवधि में चालू रहना चाहिए। अदालत ने सोशल मीडिया के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है, ताकि किसी भी प्रकार की बाहरी या सार्वजनिक गतिविधि का कोई विवाद खड़ा न हो सके। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि अंतरिम जमानत की पूरी अवधि में खालिद उन्हीं स्थानों पर रहेंगे जिन्हें उन्होंने अपनी बहन के विवाह समारोह से जुड़ा बताया है।
अदालत ने आदेश दिया है कि जमानत अवधि समाप्त होने के बाद, 29 दिसंबर को खालिद को संबंधित जेल अधीक्षक के सामने स्वयं समर्पण करना होगा। इससे पहले भी उन्हें परिवार के कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की राहत दी गई है। 2022 और 2023 में भी शादी से जुड़े आयोजनों के लिए अदालत ने सात दिनों तक की जमानत प्रदान की थी।
2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े आरोपों के तहत खालिद यूएपीए के प्रावधानों के तहत जेल में बंद हैं। उनके नाम पर दर्ज मामले, लंबी न्यायिक प्रक्रियाएं और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए हुए है। अदालत द्वारा दी गई यह राहत भले अस्थायी हो, लेकिन इससे एक बार फिर खालिद के मामले की जटिलता और न्यायिक प्रक्रिया के धीमे चलन पर चर्चा तेज होना तय माना जा रहा है।




















