दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 2017 के उन्नाव दुष्कर्म मामले (Unnao Rape Case) में दोषी करार दिए गए कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा सस्पेंड किए जाने के बाद देश की राजनीति और सामाजिक चेतना में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देश की बेटियों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजद नेता मनोज कुमार झा ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जो संदेश देश की बच्चियों तक जा रहा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उनके मुताबिक, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारे तब खोखले लगते हैं जब जमीनी हकीकत में व्यवस्थाएं बदलती नजर नहीं आतीं। उन्होंने निर्भया कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पूरा देश सड़कों पर उतरा था, लेकिन वर्षों बाद भी सिस्टम में वह सुधार दिखाई नहीं देता, जिसकी उम्मीद की गई थी।
छपरा में एक ही परिवार के तीन मासूम समेत चार की दम घुटने से मौत.. चार की हालत नाज़ुक
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने भी सवाल उठाए हैं। रांची में दिए बयान में उन्होंने कहा कि उन्नाव रेप पीड़िता जब राहुल गांधी से मिली और अपना दर्द साझा किया, तभी पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर गति पकड़ी और सीबीआई सक्रिय हुई। उनके अनुसार, इसके बाद जांच एजेंसियों की भूमिका और सरकार के रवैये पर भी सवाल उठे। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर ऐसा व्यक्ति जमानत पर बाहर कैसे आ सकता है, जिसे न्यायालय पहले ही दोषी ठहरा चुका है।




















