Upendra Kushwaha Party Row: रामेश्वर कुमार महतो ने अपने पोस्ट में राजनीति की सफलता को भाषणों से आगे बताते हुए नीयत और नीति को केंद्रीय मुद्दा बनाया। उन्होंने लिखा कि जब नेतृत्व की नीयत स्पष्ट न रहे और नीतियां जनहित से हटकर स्वार्थ की ओर बढ़ने लगें, तो जनता को लंबे समय तक भ्रम में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आज का नागरिक सजग है और हर निर्णय को बारीकी से परखता है। इस बयान में किसी व्यक्ति या पद का नाम नहीं था, लेकिन इसके शब्दों ने सियासी गलियारों में कई तरह के अर्थ पैदा कर दिए।
पोस्ट सामने आने के कुछ ही समय बाद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की प्रतिक्रिया ने मामले को और दिलचस्प बना दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वह ट्वीट नहीं देखा है, लेकिन यदि किसी को कोई परेशानी है तो उसे सार्वजनिक मंच पर लाने के बजाय परिवार के भीतर सुलझाना चाहिए। उनका यह बयान राजनीतिक के साथ-साथ पारिवारिक और संगठनात्मक संतुलन की ओर इशारा करता दिखा। इस प्रतिक्रिया के बाद यह सवाल और गहरा गया कि क्या पार्टी के भीतर असहमति खुलकर सामने आ रही है।
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हालांकि रामेश्वर कुमार महतो ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश केवल सामान्य विचार नहीं बल्कि नेतृत्व की शैली और फैसलों को लेकर एक संकेत हो सकता है। यही कारण है कि इसे पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार की राजनीति में संकेतों और प्रतीकों की भाषा पहले भी बड़े बदलावों की भूमिका निभाती रही है, ऐसे में इस पोस्ट को हल्के में नहीं लिया जा रहा।
गौरतलब है कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने एनडीए गठबंधन के तहत छह सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से चार पर पार्टी को जीत मिली थी। इन चार विधायकों में बाजपट्टी से रामेश्वर कुमार महतो, मधुबनी से माधव आनंद, दिनारा से आलोक कुमार सिंह और सासाराम से उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता शामिल हैं। सीमित संख्या के बावजूद पार्टी ने अपनी पहचान बनाई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि अंदरूनी मतभेद भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।






















