बिहार की राजनीति एक बार फिर खरमास के बाद बड़े उलटफेर की आहट से गर्म हो गई है। इस बार सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बनी है उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम)। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के वरिष्ठ नेता और जगदीशपुर विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने आरएलएम को लेकर ऐसी भविष्यवाणी कर दी है, जिसने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि खरमास खत्म होते ही आरएलएम में टूट हो सकती है और पार्टी के तीन विधायक पहले ही बगावती रुख अपना चुके हैं।
सासाराम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में आना-जाना कोई नई बात नहीं है। उनका दावा है कि आरएलएम के तीन विधायक खुद को बागी बता रहे हैं और वे किसी भी समय इधर-उधर जा सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ये विधायक जदयू में आकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ काम करना चाहते हैं तो पार्टी उनका स्वागत करेगी। उनके मुताबिक, राजनीति में किसी का तिरस्कार नहीं किया जाता, जो आता है उसका सम्मान किया जाता है।
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भगवान सिंह कुशवाहा के इस बयान को महज सामान्य टिप्पणी नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बयान सीधे तौर पर आरएलएम के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है। दरअसल आरएलएम के विधायक रामेश्वर महतो, आलोक सिंह और माधव आनंद लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उनकी असहजता साफ देखी गई है। स्थिति तब और स्पष्ट हो गई जब 12 जनवरी को पंचायती राज मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश मधुबनी दौरे पर थे, लेकिन स्थानीय विधायक माधव आनंद वहां मौजूद नहीं रहे। उनकी गैरहाजिरी को सियासी संदेश के तौर पर देखा गया।
खरमास के बाद बिहार की राजनीति में बदलाव की चर्चाएं नई नहीं हैं। मकर संक्रांति और चूड़ा-दही भोज से जुड़ी राजनीतिक परंपराएं पहले भी बड़े सियासी खेल का संकेत देती रही हैं। हाल ही में कांग्रेस के मकर संक्रांति भोज से उसके सभी छह विधायक गायब रहे थे, जिसके बाद भाजपा और जदयू नेताओं ने दावा किया था कि खरमास के बाद कांग्रेस में भी टूट संभव है। अब उसी कड़ी में आरएलएम को लेकर जदयू नेता की भविष्यवाणी ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है।
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आरएलएम के अंदर असंतोष की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया जाना। पार्टी के कुल चार विधायकों में से एक उनकी पत्नी स्नेहलता देवी हैं, जबकि बाकी तीन विधायक खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं। बताया जाता है कि इन विधायकों ने पार्टी सुप्रीमो की चर्चित ‘लिट्टी पार्टी’ से भी दूरी बना ली थी, जो उनकी नाराजगी का सार्वजनिक संकेत माना गया।
हालांकि भगवान सिंह कुशवाहा ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं है। उनके अनुसार नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और बने रहेंगे, सरकार में किसी तरह के बदलाव के आसार नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद आरएलएम में संभावित टूट को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं। सवाल यही है कि क्या खरमास के बाद वाकई बिहार की राजनीति में नया सियासी समीकरण उभरेगा या यह महज बयानबाजी तक सीमित रहेगा।






















