दिल्ली से पटना लौटे राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुर्सी को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि नीतीश कुमार थे, हैं और आगे भी मुख्यमंत्री रहेंगे। उन्होंने पत्रकारों के बार-बार पूछने पर दोहराया कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे और इस पर किसी को भ्रम की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि उनकी पार्टी के खाते में मंत्रिमंडल में कितनी भागीदारी होगी, तो कुशवाहा ने मुस्कुराते हुए कहा कि इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी लगातार आरोप लगा रही थीं कि बिहार चुनाव में वोट की डकैती हुई है। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कुशवाहा ने कहा कि यदि वास्तव में वोट की चोरी हुई होती तो जिनका वोट छीना गया, वे सड़क पर उतरते। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि केवल बयान देने से कोई सच्चाई साबित नहीं होती, जनता सब जानती है और हकीकत समझती है। उनके अनुसार विपक्ष सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रहा है ताकि हार का ठीकरा किसी और पर फोड़ा जा सके।
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कांग्रेस की वोटर अधिकार यात्रा पर भी उपेंद्र कुशवाहा ने टिप्पणी करते हुए इसे पूरी तरह असरहीन बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने इस अभियान को मुद्दा ही नहीं माना क्योंकि यह किसी वास्तविक जन-चिंता से संबंधित नहीं था। यही कारण रहा कि यह यात्रा जमीन पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ सकी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रहे विवाद पर कुशवाहा ने संयमित लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि परिवार का मसला परिवार के भीतर ही सुलझना चाहिए, लेकिन जो स्थिति बनी है वह होना तय था और जनता सब देखती रहती है। उनके अनुसार जब कोई पार्टी अपने परिवार तक में एकजुटता नहीं ला पाती, तो जनता उस पर भरोसा कैसे करेगी। इसी वजह से विपक्ष की हार और भी गहरी हो गई।
शिवानंद तिवारी और लालू यादव के हालिया बयानों पर उन्होंने किसी तरह की सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि इन बातों की व्याख्या स्वयं लालू प्रसाद ही कर सकते हैं। वहीं, तेजस्वी यादव द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक पर कुशवाहा ने कहा कि इसमें कोई समस्या नहीं है और समीक्षा करना हमेशा लोकतंत्र के लिए सकारात्मक होता है।






















