राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को लेकर उठ रही परिवारवाद की आवाज़ों पर पहली बार खुलकर जवाब दिया है। 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद जहां कुशवाहा की पार्टी चार सीटें जीतकर चर्चा में आई, वहीं बेटे के राजनीतिक प्रवेश को लेकर आलोचना तेज हो गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखे अपने विस्तृत बयान में कुशवाहा ने इस निर्णय की पृष्ठभूमि समझाते हुए साफ कहा कि यह कदम परिवारवाद नहीं, बल्कि पार्टी के अस्तित्व की मजबूरी था।
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि पार्टी के फैसले पर उत्साहवर्धक और आलोचनात्मक—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। स्वस्थ आलोचना को उन्होंने खुले मन से स्वीकार किया, लेकिन ‘दूषित आलोचनाओं’ को पूर्वाग्रह से भरा बताया। कुशवाहा ने कहा कि परिवारवाद का आरोप लगाने वालों को उनके पिछले राजनीतिक अनुभव को समझना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी का पहले हुए विलय का फैसला बेहद अलोकप्रिय साबित हुआ था, जिसके बाद संगठन लगभग शून्य पर पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि वह फिर उसी हालात में लौटने का खतरा नहीं उठा सकते थे, इसलिए कठिन और कड़वा निर्णय लेना पड़ा।
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अपने बयान में उन्होंने ‘समुद्र मंथन’ का उदाहरण देते हुए लिखा कि कुछ निर्णय अमृत नहीं, ज़हर लेकर आते हैं, और इस बार पार्टी को बचाने के लिए ज़हर उन्हें ही पीना पड़ा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे फैसले लोकप्रियता को जोखिम में डालते हैं, पर पार्टी संरचना और भविष्य के लिए कभी-कभी कठोर कदम आवश्यक हो जाते हैं। आलोचकों के एक वर्ग को संबोधित करते हुए उन्होंने दो पंक्तियों में जवाब दिया- ‘सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया… तकलीफ़ उन्हें बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया।’
अपने बेटे दीपक प्रकाश पर उठे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि दीपक किसी ‘फेल विद्यार्थी’ की तरह नहीं, बल्कि कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त और संस्कारों से संपन्न युवा है। कुशवाहा ने भरोसा जताया कि दीपक समय के साथ अपनी योग्यता साबित करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति या परिवार की पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मेहनत से होना चाहिए।
गौरतलब है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को भारी बहुमत मिला, जिसमें राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने छह सीटों पर चुनाव लड़कर चार पर जीत दर्ज की। इन चार में से एक सीट उनकी पत्नी के नाम भी रही। जीत के बावजूद बेटे की भूमिका को लेकर उठ रही आलोचनाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म किया है, जिस पर अब कुशवाहा का यह सख्त बयान पार्टी के अंदर और बाहर नई बहस को जन्म दे रहा है।






















