बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए वंशावली (Urban Vanshavali Bihar) बनवाना अब तक एक जटिल, समय लेने वाली और थकाने वाली प्रक्रिया मानी जाती थी. नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को पहले वार्ड पार्षद के पास आवेदन देना पड़ता था, फिर नगर निकाय कार्यालय, उसके बाद अंचल कार्यालय और अंत में अंचलाधिकारी तक दौड़ लगानी पड़ती थी. इस पूरी प्रक्रिया में न केवल समय बर्बाद होता था बल्कि स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में आम लोगों को बार-बार असमंजस का भी सामना करना पड़ता था.
इसी लंबे समय से चली आ रही समस्या को खत्म करने के लिए बिहार सरकार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग ने संयुक्त रूप से शहरी क्षेत्रों के लिए वंशावली निर्गत करने की नई व्यवस्था लागू कर दी है. खास बात यह है कि दोनों विभागों की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास है, ऐसे में विभागीय समन्वय के जरिए इस निर्णय को तेजी से जमीन पर उतार दिया गया है.
बुधवार, 24 दिसंबर 2025 को प्रधान सचिव सीके अनिल द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक सीधे अपने संबंधित अंचल क्षेत्र के अंचलाधिकारी से वंशावली प्राप्त कर सकेंगे. इस आदेश के साथ ही अंचल अधिकारी को शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने का सक्षम प्राधिकार घोषित कर दिया गया है. यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जिससे लाखों शहरी नागरिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
सरकारी आदेश में यह भी स्वीकार किया गया है कि अब तक शहरी इलाकों में वंशावली जारी करने को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी. यही वजह थी कि नागरिकों को अलग-अलग स्तर पर भटकना पड़ता था. इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के परिपत्र के तहत सरपंच द्वारा वंशावली निर्गत करने की व्यवस्था पहले से लागू है. शहरी और ग्रामीण व्यवस्था के बीच इसी असंतुलन को दूर करने के लिए यह संयुक्त विधिक पहल की गई है.
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि कानूनी, सामाजिक और पारिवारिक मामलों में भी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों, उत्तराधिकार प्रमाण, सरकारी योजनाओं और विभिन्न न्यायिक प्रक्रियाओं में वंशावली एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है. अब अंचलाधिकारी स्तर पर स्पष्ट अधिकार तय होने से अनावश्यक देरी और भ्रम की स्थिति खत्म होगी.






















