बिहार की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रगीत गीत ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) को लेकर तेज़ बयानबाज़ी की आग में घिर गई है। मुस्लिम संगठनों द्वारा वंदे मातरम के विरोध और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात सामने आते ही केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे सीधे तौर पर राष्ट्रवाद, इतिहास और कानून के दायरे से जोड़ते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि आज़ादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है, जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ जनभावनाओं को संगठित किया।
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उनके मुताबिक मुस्लिम लीग के दौर में हुए विरोध के दबाव में कांग्रेस ने इसे हाशिए पर धकेला, लेकिन आज आम मुसलमान इसका विरोध नहीं कर रहे, बल्कि कुछ कट्टरपंथी चेहरे इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। गिरिराज सिंह के बयान में धार्मिक बहस से आगे बढ़कर ‘कानून का राज’ का तर्क केंद्र में रहा और उन्होंने दो टूक कहा कि भारत किसी मजहबी क़ानून से नहीं, संविधान और विधि-व्यवस्था से चलेगा, इसलिए जो भारत का कानून कहेगा, वही मान्य होगा।
इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि अदालत जाना हर नागरिक का अधिकार है और देश में कानून काम करता है। उनके बयान का सार यही रहा कि भारत में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दोहरी कसौटी स्वीकार्य नहीं हो सकती। वंदे मातरम को लेकर उन्होंने इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए देश के प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन कैसे बने, खासकर तब जब यह मुद्दा चुनावी माहौल में उछलकर सामने आए।
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विवाद यहीं नहीं रुका। गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेता राहुल गांधी पर भी तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि किसानों के मुद्दे पर भ्रम फैलाया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील को लेकर डर का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के किसानों के हितों के खिलाफ कोई समझौता नहीं होगा। इसके बावजूद अफवाहें फैलाई जा रही हैं। गिरिराज सिंह के अनुसार राहुल गांधी का रुख विरोधाभासी है, जहां एक तरफ वंदे मातरम पर चुप्पी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के नाम पर सियासी बयानबाज़ी तेज़ की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार झूठे दावे किए जाते हैं और अदालत में माफी मांगने की नौबत आने के बाद भी राजनीतिक तेवर नहीं बदलते।






















