केंद्रीय संसद के दोनों सदनों से VB-G RAM G Bill 2025 के पारित होते ही देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। एक ओर सरकार इसे मजदूर वर्ग, रोज़गार और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसके विरोध में सदन के भीतर और बाहर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। इसी मुद्दे पर सत्ता पक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिन्होंने विपक्ष पर गांधी के नाम पर राजनीति करने और मजदूरों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिल के पारित होने के बाद साफ शब्दों में कहा कि इस कानून का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिनका मजदूर वर्ग से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। उनके अनुसार VB-G RAM G बिल 2025 पूरी तरह मजदूरों के हित में है और जो दल या नेता इसका विरोध कर रहे हैं, वे असल में मजदूरों के दुश्मन हैं। गिरिराज सिंह का यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करता है और सरकार के उस नैरेटिव को मजबूत करता है, जिसमें यह बिल रोज़गार और आजीविका को नई दिशा देने वाला बताया जा रहा है।
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VB-G RAM G बिल 2025 पर भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि TMC ने मनरेगा योजनाओं में हजारों-करोड़ों का भ्रष्टाचार किया। आज तक सैकड़ों करोड़ों की योजनाओं को लेकर वे सबूत नहीं दे सके। जी-राम-जी के बाद अब इस योजना में घोटाला करना संभव नहीं हो पाएगा और यही बात TMC और कांग्रेस को खटक रही है। 7 बार इस योजना का नाम बदला गया है। आज ‘विकसित भारत गारंटी रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ नाम हो गया है तो क्या समस्या है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि ईश्वर और गांधी के नाम पर कोई योजना नहीं होनी चाहिए क्योंकि यदि उसमें घोटाला होगा तो यह भगवान और गांधी के नाम पर शर्मिंदगी होगी… यह एक अच्छी योजना है। 100 के बदले 125 दिन का रोजगार मिलेगा, पारदर्शिता होगी, गांवों में लोग आगे बढ़ेंगे। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है?”
वहीं, विपक्ष के विरोध और सदन में हंगामे को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गांधीवादी मूल्यों की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग महात्मा गांधी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि बापू के आदर्श क्या थे। चिराग पासवान ने सांसदों द्वारा सदन में कागज फेंकने और हंगामा करने को गांधी के विचारों के खिलाफ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आक्रोश दर्ज कराने के लिए पर्याप्त अवसर होते हैं और दिए भी गए हैं, लेकिन हिंसा और अव्यवस्था किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकती। चिराग पासवान ने गांधी के अंतिम शब्द ‘हे राम’ का उल्लेख करते हुए यह सवाल भी उठाया कि जब महात्मा गांधी राम के नाम के साथ अपनी अंतिम सांस ले सकते हैं, तो राम के नाम पर आपत्ति क्यों?
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सदन के भीतर हुए हंगामे को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का बयान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के व्यवहार को लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया। निशिकांत दुबे के अनुसार कानून में संशोधन और असहमति जताने के लिए एक संवैधानिक तरीका होता है, लेकिन हिंसात्मक रवैया अपनाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और ईमानदारी का जो पाठ देश को पढ़ाया, उसी भावना के तहत भाजपा ने आठ सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। उनका यह भी कहना है कि आने वाले बजट सत्र तक इन सांसदों को संसद की कार्यवाही से बाहर रखा जाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक मर्यादा बनी रहे।
VB-G RAM G बिल 2025 को लेकर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी विपक्ष पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ दल गांधी जी के नाम का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उनके सपनों को साकार करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाते। मनोज तिवारी के अनुसार गांधी जी का सपना एक ऐसा भारत था, जहां हर व्यक्ति को काम मिले और देश आर्थिक रूप से मजबूत बने। उन्होंने इस बिल के तहत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन को विकसित भारत की नींव बताया। उनका कहना है कि 100 दिन की जगह अब 125 दिन तक रोज़गार की गारंटी देना गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बड़ा बदलाव साबित होगा। मनोज तिवारी ने यह भी जोड़ा कि गांधी जी आज भी गरीबों के घर निर्माण और रोज़गार के अवसरों में जीवित हैं, लेकिन विपक्ष इस सच्चाई को समझने को तैयार नहीं है।






















