वीबी जी रामजी बिल’ (VB-G-RAM-G Bill) लोकसभा से पास हो गया है, विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सरकार ने इसे पारित करवाया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर इस समय विपक्षी सांसदों द्वारा कागज भी फेंके गए। भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लोकसभा में करीब दस घंटे तक चली चर्चा के दौरान विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन जब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जवाब देने खड़े हुए तो कांग्रेस सांसदों ने बिल को फाड़ने जैसी हरकत की।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अब अराजकता की राजनीति पर उतर आई है। रवि शंकर प्रसाद ने गांधी जी के नाम को लेकर भी विपक्ष को घेरा और कहा कि स्वच्छ भारत, गरीबों के लिए आवास, हर घर नल से जल जैसी योजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं और यही असल में गांधी जी के विचारों की जीवंत तस्वीर हैं। उनके मुताबिक गांधी केवल नाम में नहीं, बल्कि उन योजनाओं में बसते हैं जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। विपक्ष के आचरण से पीड़ा जताते हुए उन्होंने पूछा कि क्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विपक्ष का भरोसा खत्म हो गया है।
लोकसभा में हंगामे के बीच VBG Ram G बिल पास.. विपक्षी सांसदों ने पेज फाड़कर उड़ाए
इसी मुद्दे पर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने VB-G-RAM-G बिल के नाम को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि राम जी के नाम पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए, जबकि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ थे। शाहनवाज हुसैन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राम को काल्पनिक मानती रही है और इसी वजह से राम के नाम से जुड़ी हर पहल पर उसे आपत्ति होती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी योजना के नाम में सांस्कृतिक आस्था को जोड़ना देश की परंपरा और भावना का हिस्सा है, न कि किसी को ठेस पहुंचाने की साजिश।
लोकसभा में VB-G-RAM-G बिल के पारित होने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी विपक्ष की भूमिका पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह योजना देश के गांवों को मजबूत करने की सोच के साथ लाई गई है और महात्मा गांधी के उस विचार से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। चिराग पासवान के अनुसार सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और आजीविका को स्थायी बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन मर्यादा तोड़कर अपनी बात रखना न लोकतंत्र के हित में है और न ही देश के।






















