पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित भूमि सुधार जनकल्याण कार्यशाला केवल एक औपचारिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह साफ संदेश देने का मंच बन गई कि अब भूमि सुधार विभाग में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा (Vijay Sinha Action Mode) की अध्यक्षता में हुई इस कार्यशाला में प्रशासनिक सख्ती, जवाबदेही और परिणाम आधारित कामकाज पर खास जोर देखने को मिला।
मासिक समीक्षा रिपोर्ट में खराब प्रदर्शन करने वाले अंचलों के अंचलाधिकारियों को जब मंच पर खड़ा कर सवालों के घेरे में लिया गया, तो माहौल खुद-ब-खुद गंभीर हो गया। उप मुख्यमंत्री ने सीधे शब्दों में पूछा कि अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अंचलों की स्थिति लगातार नीचे क्यों बनी हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल लीव का बहाना अब काम नहीं आएगा और महीने के अंत तक ठोस सुधार नहीं दिखा तो कार्रवाई तय है।

विजय सिन्हा ने यह संकेत भी दिया कि विभाग में सिर्फ दंड नहीं, बल्कि प्रोत्साहन की नीति भी समानांतर रूप से लागू होगी। जो अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा और इसके लिए 31 दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। उनका कहना था कि विभाग में अब नियमित मासिक मॉनिटरिंग होगी, ताकि फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर सुधार नजर आए।
उन्होंने बताया कि 24 नवंबर को जिम्मेदारी संभालने के बाद सबसे पहले दाखिल-खारिज और परिमार्जन के लंबित मामलों को प्राथमिकता दी गई। जिला स्तर पर लंबित मामलों की विस्तृत सूची मंगाई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि देरी की असल वजह कहां है। उप मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि विभाग के पास कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है और ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों को किसी भी तरह के दबाव या धमकी से डरने की जरूरत नहीं है।
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भूमि विवाद और अतिक्रमण को बिहार की बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक बताते हुए विजय सिन्हा ने कहा कि अब अंचल कार्यालयों को केवल दफ्तर नहीं, बल्कि समाधान केंद्र की तरह काम करना होगा। जनता की जानकारी के लिए हर अंचल कार्यालय में बैनर और पोस्टर लगाए जाएंगे। फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने के मामलों में डीसीएलआर के साथ समन्वय कर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि थाना सहयोग नहीं करता है, तो लिखित आवेदन के जरिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है।
उन्होंने अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि यदि जिला स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। सूचनाओं को पूरी तरह गोपनीय रखने का आश्वासन देते हुए हर अंचल कार्यालय में शिकायत पेटी रखने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि आम लोगों और कर्मचारियों की आवाज सीधे विभाग तक पहुंचे।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सुधार सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जनता को जमीन पर महसूस होना चाहिए। 14 जनवरी मकर संक्रांति के बाद सकारात्मक ऊर्जा के साथ समीक्षा बैठकों की गति और तेज की जाएगी। मासिक समीक्षा, फील्ड निरीक्षण और डायरेक्ट एक्शन के जरिए भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने का रोडमैप तय कर दिया गया है।






















