नई दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान कहा कि इस विधेयक में अपील का अधिकार शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि अगर किसी को ट्रिब्यूनल में अपना अधिकार नहीं मिलता, तो वह इस अपील के अधिकार के तहत अदालत में याचिका दायर कर सकता है। यह बयान उस समय आया जब विधेयक को राज्यसभा में पेश किया गया, जिसे पहले लोकसभा में 02 अप्रैल 2025 को 288 मतों के समर्थन और 232 मतों के विरोध के साथ पारित किया जा चुका है।
विधेयक का उद्देश्य और नया नाम
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना, तकनीकी रूप से प्रबंधन को सुदृढ़ करना और कानूनी जटिलताओं को दूर करना है। किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विधेयक को पेश करते हुए घोषणा की कि इस विधेयक का नाम अब UMEED (Unified Waqf Management Empowerment Efficiency and Development) Bill रखा जाएगा। उन्होंने विपक्ष के उन दावों को खारिज किया जिसमें विधेयक को असंवैधानिक बताया गया था। रिजिजू ने कहा, “अगर यह असंवैधानिक होता, तो अदालत इसे रद्द कर देती। हमें ‘संवैधानिक’ और ‘असंवैधानिक’ जैसे शब्दों का हल्के में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”
मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 भी पारित
वक्फ संशोधन विधेयक के साथ-साथ, लोकसभा ने मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 को भी मंजूरी दी, जिसके तहत 1923 के मुसलमान वक्फ अधिनियम को निरस्त कर दिया गया। यह अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके खातों को प्रकाशित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप अपडेट करने के लिए निरस्त किया गया है।
विपक्ष का आरोप: सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान बीजेपी पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बीजेपी 2024 के चुनाव में बहुमत हासिल करने में विफल रही और अब इस विधेयक के जरिए अपने वोट बैंक को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यह सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की रणनीति है।” वक्फ संशोधन विधेयक में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसके तहत एक केंद्रीकृत पोर्टल बनाया जाएगा, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को स्वचालित करेगा और पारदर्शिता को बढ़ाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस बात पर चिंता जताई कि वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को उच्च न्यायालयों में अपील करने की सीमित व्यवस्था पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है।
पिछले मुद्दों पर प्रकाश
वक्फ संपत्तियों के सर्वे में देरी भी एक बड़ा मुद्दा रहा है। गुजरात और उत्तराखंड में सर्वे अभी तक शुरू नहीं हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में 2014 का सर्वे अभी भी लंबित है। इस विधेयक के जरिए इन समस्याओं को हल करने की कोशिश की जा रही है। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े बदलाव की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस जारी है, और यह देखना बाकी है कि यह विधेयक लागू होने के बाद कितना प्रभावी साबित होता है।