नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा पेश वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के जरिए वक्फ बोर्ड के अधिकारों और संपत्ति दावों के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्ड का कोई भी फैसला अब अंतिम नहीं माना जाएगा और संपत्ति पर दावा करना भी पहले जितना आसान नहीं रहेगा। लोकसभा में पेश इस बिल को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है, लेकिन अगर यह कानून बन जाता है तो वक्फ व्यवस्था में क्या-क्या बदलाव आएंगे, आइए जानते हैं।
वक्फ का फैसला अब पक्का नहीं
नए विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि वक्फ बोर्ड को यह तय करने का एकमात्र अधिकार नहीं रहेगा कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। अभी तक बोर्ड के पास यह शक्ति थी कि वह किसी भी जमीन या संपत्ति को वक्फ घोषित कर दे, जिसके बाद उस पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता था। लेकिन अब यह अधिकार जिला कलेक्टर को दिया जा रहा है। कलेक्टर संपत्ति के स्वामित्व की जांच करेगा और उसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। अगर संपत्ति सरकारी पाई गई तो उसे वक्फ से बाहर कर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा।
‘वक्फ बाय यूजर’ का अंत
‘वक्फ बाय यूजर’ यानी लंबे समय तक इस्तेमाल के आधार पर संपत्ति को वक्फ मानने की पुरानी व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव है। पहले अगर कोई जमीन मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह के लिए इस्तेमाल होती थी, तो उसे वक्फ संपत्ति मान लिया जाता था। नए नियमों में यह प्रावधान हटाया जा रहा है। अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ मानी जाएगी, जिसे कोई व्यक्ति कम से कम पांच साल से इस्लाम का पालन करते हुए औपचारिक रूप से वक्फ के लिए समर्पित करे।
संपत्ति दावों पर सख्ती
वक्फ बोर्ड द्वारा संपत्ति पर दावे को लेकर भी नियम सख्त होंगे। विधेयक के मुताबिक, हर वक्फ संपत्ति को छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वक्फ उस संपत्ति पर मुकदमा या कानूनी दावा करने का अधिकार खो सकता है। हालांकि, कोर्ट को यह छूट होगी कि वह देरी के कारणों का हलफनामा देखकर वक्फ को राहत दे सके। जिला कलेक्टर इस पंजीकरण की समीक्षा करेगा और विवादित संपत्तियों की स्थिति तय करेगा।
बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिलाओं की एंट्री
वक्फ बोर्ड की संरचना में भी बदलाव होगा। नए नियमों के तहत बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों और महिलाओं को शामिल किया जाएगा। साथ ही, मुस्लिम ओबीसी समुदाय से भी एक सदस्य की नियुक्ति होगी। सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बोर्ड का प्रबंधन सभी वर्गों के लिए जवाबदेह होगा।
क्या कहती है सरकार, क्या है विरोध?
केंद्र सरकार का दावा है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और दुरुपयोग पर रोक लगाएगा। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पुराने नियमों का गलत इस्तेमाल कर कई संपत्तियों पर जबरन दावा किया गया, जिसे अब रोका जाएगा। वहीं, विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम वक्फ बोर्ड को कमजोर करेगा और सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ावा देगा। यह विधेयक अभी लोकसभा में चर्चा के लिए है और 4 अप्रैल तक चलने वाले सत्र में इसे पारित करने की कोशिश होगी। बीजेपी और एनडीए सहयोगी इसे समर्थन दे रहे हैं, लेकिन विपक्ष इसे रोकने के लिए तैयार है। अगर यह कानून बनता है, तो वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और विवाद निपटारा पूरी तरह बदल जाएगा, जिसका असर देश भर की लाखों संपत्तियों पर पड़ेगा।