बिहार में उमस भरी गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। तापमान 40 के करीब पहुंच चुका है। फिलहाल, बिहार के अधिकतर भागों में मानसून कमजोर पड़ चुका है। यही वजह है कि लोगों को उमस भरी यह गर्मी सताने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, 26-27 जुलाई तक तेज बारिश के आसार नहीं हैं। उत्तर बिहार की ओर छिटपुट थंडरस्टॉर्म की गतिविधियां होंगी, लेकिन झमाझम के लिए इंतजार करना होगा।
मानसून ट्रफ आसपास नहीं
सूबे के किसी भी हिस्से से मानसून ट्रफ नहीं गुजर रहा है। कोई स्थानीय सिस्टम भी विशेष प्रभावी नहीं है। इससे बारिश की किल्लत बढ़ रही है। उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की ओर एक सिस्टम बना है जिसका असर उत्तर बिहार में कुछ जगहों पर आंशिक रूप से गरज तड़क के रूप में दिख सकता है। 23 जुलाई को उत्तर बिहार के जिलों एक दो जगहों पर वज्रपात का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
प्रदेश में 41 फीसदी कम हुई बारिश
रोपनी के समय में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले तीन-चार दिनों से बारिश न के बराबर हो रही है। जून जुलाई के महीने में प्रदेश में 41 फीसदी कम बारिश हुई है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को मौसम विभाग के प्रतिनिधि ने दी। उन्होंने कहा कि जून में 85 एमएम बारिश हुई जो सामान्य से 163.3 एमएम से 48% कम है। वहीं 1 जुलाई से 21 जुलाई तक 152.30 एमएम बारिश हुई, जो सामान्य बारिश 242.4 एमएम से 47% कम है। वहीं 1 जून से लेकर 21 जुलाई तक राज्य में 405.7 मिमी बारिश होनी थी, लेकिन मात्र 238.3 मिमी बारिश हुई है। पूरे प्रदेश में 41 फीसदी कम बारिश हुई है।
CM ने की बैठक, किसाानों को सहायता का दिया भरोसा
बिहार में बारिश की कमी को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक की है। इस बैठक में नीतीश कुमार ने कृषि कार्य के लिए किसानों को डीजल अनुदान उपलब्ध कराने और 12 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने का आदेश दिया है।उन्होंने जल संसाधन विभाग को नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और लगातार इसकी निगरानी करने को कहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। ताकि उन्हें खेती के काम में कोई भी परेशानी का सामना ना करना पड़े। राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। राज्य के 75 प्रतिशत लोगों की आजीविका का आधार कृषि है।




















