पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच बयानबाजी अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर बिहार की राजनीति में भी साफ दिखने लगा है। इस चुनावी माहौल में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के एक बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को अलीपुरद्वार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा की तुलना सांप से कर दी। उन्होंने कहा कि भाजपा एक सांप की तरह है और अगर कोई अपने आंगन में एक या कई सांप पालता है, तो आखिरकार वही सांप उसे काटेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि आगामी विधानसभा चुनाव में यह सुनिश्चित किया जाए कि अलीपुरद्वार में कोई “सांप” न बचे। अभिषेक बनर्जी के इस बयान को सीधे तौर पर भाजपा के खिलाफ तीखा हमला माना जा रहा है, जिसे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
टीएमसी नेता के इस बयान पर भाजपा की ओर से कड़ा पलटवार सामने आया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने अभिषेक बनर्जी के शब्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सांप नहीं, बल्कि सपेरा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सपेरा बनकर उन लोगों का सफाया करेगी, जो खुद को सांप की तरह राजनीति में पेश कर रहे हैं। संजय सरावगी ने दावा किया कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सफाया होगा और वहां भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनेगी।
सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि बिहार के नेताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर अपने बयान दिए हैं। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ओवैसी अक्सर सनसनीखेज सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान देते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ओवैसी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी नसीहत दे रहे हैं और वह दुआ करते हैं कि ट्रंप उनकी सलाह पर विचार करें।
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दिलीप जायसवाल ने अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन में बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या बढ़ी है और बंगाल की हालत बद से बदतर हो गई है। उन्होंने कहा कि अब टीएमसी नेताओं को हिंदुओं की चिंता सताने लगी है, जबकि बंगाल में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की सच्चाई सनातन परंपरा को मानने वाले लोग पहले से जानते थे।






















