पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (West Bengal SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब संवैधानिक बहस के केंद्र में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रिट याचिका पर विस्तार से दलीलें रखी गईं। TMC सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने सुनवाई के बाद कहा कि कोर्ट ने याचिका में उठाए गए अहम मुद्दों को गंभीरता से सुना है और आवश्यकता पड़ने पर बहस के लिए अतिरिक्त समय देने का संकेत भी दिया है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े दो बुनियादी सवालों को केंद्र में रखा। पहला मुद्दा मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर था, जिस पर तर्क दिया गया कि बीते चार महीनों से नाम जोड़ने की कोई समानांतर प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई। इस असंतुलन को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए कहा गया कि इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। दूसरा बड़ा सवाल माइक्रो-ऑब्ज़र्वर और रोल ऑब्ज़र्वर की नियुक्ति को लेकर उठा, जहां यह दलील दी गई कि इन नियुक्तियों के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं है और कई रोल ऑब्ज़र्वर SDM रैंक के भी नहीं हैं।
कल्याण बनर्जी के मुताबिक, कोर्ट के सामने यह भी रखा गया कि कई रोल ऑब्ज़र्वर कोल इंडिया, RBI जैसे संस्थानों से लाए गए हैं, जबकि सभी माइक्रो-ऑब्ज़र्वर कथित तौर पर BJP शासित राज्यों से नियुक्त किए गए हैं। तर्क यह दिया गया कि जहां-जहां गैर-BJP सरकारें हैं, वहां प्रक्रिया को असामान्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि BJP शासित राज्यों में SIR की शुरुआत तक नहीं हुई है। इस कथित दोहरे मानदंड को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया।
सुनवाई के दौरान तार्किक विसंगतियों का मुद्दा भी उठा। यह कहा गया कि मतदाता सूची में बेहद छोटी तकनीकी गलतियों को भी अत्यंत गंभीर मानते हुए नाम हटाने जैसी कठोर कार्रवाई की जा रही है। TMC की ओर से आग्रह किया गया कि चुनाव आयोग इन सभी पहलुओं पर दोबारा विचार करे ताकि किसी भी नागरिक के मताधिकार को नुकसान न पहुंचे।
कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि चूंकि समय-सीमा में केवल चार दिन शेष हैं, इसलिए सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार तक स्थगित कर दिया गया है और चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा गया है। इस दौरान EC की ओर से यह तर्क भी सामने आया कि पश्चिम बंगाल में पर्याप्त संख्या में SDM उपलब्ध नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या ग्रेड-2 अधिकारियों की सहायता ली जा सकती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सुझाव पर सहमति जताई, जिससे संकेत मिलता है कि अदालत व्यावहारिक समाधान की दिशा में भी सोच रही है।






















