चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस में दिवंगत नेता रामविलास पासवान के विरासत को लेके जंग छिड़ी हुई है। लोक जनशक्ति पार्टी के दो गुटों में बटने के बाद से ही दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी बने हुए हैं। दोनों में लोक जनशक्ति पार्टी की दावेदारी को लेकर लेकर लड़ाई शुरू हुई थी। जो लड़ाई राज्य निर्वाचन आयोग तक पहुँच गई। निर्वाचन आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह बंगला छाप को 2 अक्टूबर 2021 को सीज कर दिया था। अभी भी दोनों में बंगला छाप को लेकर लड़ाई जारी है। इस मामले में चुनाव आयोग में सुनवाई होनी थी पर इसे टाल दिया गया है। दरअसल चिराग पासवान ने व्यस्तता का हवाला दिया था जिसके बाद सुनवाई को टाला गया है।
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दो गुटों में बंट गई पार्टी
रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान और भाई पशुपति पारस में विरासत को लेकर लड़ाई बढ़ी। जिसके बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। पारस वाले गुट का नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का नाम मिला और चुनाव चिन्ह के रूप में सिलाई मशीन आवंटित किया गया। वही चिराग वाले गुट को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का नाम मिला और चुनाव चिन्ह हेलिकॉप्टर छाप मिला। चुनाव आयोग लोक जनशक्ति पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को सीज तो कर दिया गया। अभी भी इस बात को लेकर जंग जारी है कि आखिर बंगला छाप किसाका होगा।
टल गई सुनवाई
बंगला छापे के अधिकार को लेकर चुनाव आयोग आज यानी मंगलवार को सुनवाई करने वाला था। चुनाव आयोग ने पशुपति पारस और चिराग पासवान को हाजिर होने का आदेश दिया था। चिराग पासवान ने कुढनी उपचुनाव को लेकर व्यस्त चल रहे इस वजह से उन्होंने हाजिर होने में असमर्थता जताई। जिस वजह से आयोग ने सुनवाई को टाल दिया। हालांकि अगली सुनवाई कब होगी इस बारे में आयोग ने कुछ भी साफ नहीं किया है। मतलब ये कि चाचा पशुपति पारस और भतीजे चिराग पासवान के बीच बंगला छाप पर अधिकार को लेकर लंबाई अभी लंबी चलेगी।




















