2024 के लोकसभा चुनाव में कौन जीतेगा ये चुनाव और मतगणना के बाद पता चलेगा। लेकिन इससे पहले एक तरह से विपक्ष की लगभग सभी पार्टियों ने मान लिया है कि नरेंद्र मोदी और भाजपा को हराने के लिए एकता जरुरी है। यानि सभी विपक्षी दलों को साथ आना होगा। सब साथ आएं या न आएं, अधिकतर को तो आना ही होगा। पीएम पद का विपक्षी उम्मीदवार कौन होगा, विपक्ष की एकता में कांग्रेस की भूमिका क्या होगी, यह सबकुछ बाद की बात है। लेकिन नीतीश कुमार को जिस तरह उनके समर्थक पीएम पद का उम्मीदवार मान चुके हैं, यह उनके सहयोगी को रास नहीं आ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सभी दल के समर्थक अपने नेता को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं, तो क्या सभी पीएम बन जाएंगे?

पोस्टर पर रार
दरअसल, पूरा विवाद शुरू हुआ है जदयू के कुछ पोस्टरों पर। इन पोस्टरों में कुछ नारे हैं। ‘आश्वासन नहीं, सुशासन’, ‘आगाज हुआ: बदलाव होगा’, ‘मन की नहीं काम की’, ‘जुमला नहीं, हकीकत’… इन नारों के बड़े पोस्टर-होर्डिंग पटना में लग गए हैं। लेकिन असली विवाद है ‘प्रदेश में दिखा, देश में दिखेगा’ वाले पोस्टर पर। कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा का कहना है कि पीएम पद पर अभी फैसला हुआ ही नहीं है। आगे बैठेंगे तो जो राय बनेगी, उसके अनुरुप दावेदार का नाम तय होगा। उन्होंने तो इस पोस्टर से जदयू के संबंध नहीं होने की बात कही।
जदयू ने बताया, हमने लगाए पोस्टर

वहीं दूसरी ओर जदयू के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि जो पोस्टर लगे हैं, वो हमने ही लगाए हैं। इसका अर्थ जिसको जो समझ में आए, निकालते रहें। हमारे लिए इसके मायने जो हैं, वही रहेंगे।




















