1 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) भारत सरकार की एक सफल और लोकप्रिय स्वास्थ्य पहल बनी हुई है, जो आम नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराती है। इस योजना के तहत सस्ती दवाओं की पहुंच बढ़ाने से लाखों परिवारों का स्वास्थ्य व्यय काफी कम हुआ है।
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बजट 2026 के संदर्भ में स्वास्थ्य क्षेत्र की उम्मीदें बढ़ रही हैं, जहां विशेषज्ञ और इंडस्ट्री PMBJP जैसे कार्यक्रमों के लिए अधिक फंडिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और दवाओं की पहुंच बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। यह योजना न केवल सस्ती दवाएं प्रदान करती है, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाती है।
सरकार ने लोगों को किफायती दामों पर अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां देने के लिए यह योजना शुरू की है. पिछले 11 सालों में इस योजना की वजह से नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब ₹38,000 करोड़ की बचत हुई है. इससे परिवारों को अपनी जेब से होने वाले स्वास्थ्य खर्च में बड़ी कमी आई है, जो 2014-15 में कुल स्वास्थ्य खर्च का 62.6% था, वह 2021-22 में घटकर 39.4% रह गया.जन औषधि केंद्र (जेएके) में दवाइयों की लगातार आपूर्ति और उपलब्धता बनाए रखने के लिए पूरी तरह आईटी-सक्षम सप्लाई चेन बनाई गई है. इसमें एक केंद्रीय गोदाम, चार क्षेत्रीय गोदाम और पूरे देश में 39 डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं. 400 जल्दी बिकने वाली दवाइयों की रेगुलर मॉनिटरिंग की जाती है ताकि ये हमेशा उपलब्ध रहें.






















