वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। एक तरफ देशभर में वक्फ बिल का विरोध हो रहा है तो दूसरी तरफ मोदी सरकार कल यानी 2 अप्रैल को संसद में बिल पास कराने की तैयारी में है। इस पर तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह से पूछा गया कि कांग्रेस कह रही है वक्फ संशोधन विधेयक संविधान के खिलाफ है, जेडीयू जैसी सेक्लयुर पार्टी को अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए।
इस पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में नीतीश कुमार के नेतृत्व में मुसलमानों का सशक्तिकरण हुआ है, जद (यू) या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को कांग्रेस से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल पर नजर डालनी चाहिए कि उन्होंने बिहार और देश में लंबे समय तक शासन किया, लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया? नीतीश जी ने पिछले 20 वर्षों में मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जो किसी भी अन्य राज्य में देखने को नहीं मिले।
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ललन सिंह ने पूछा कि भागलपुर दंगे किसके शासन में हुए थे? नीतीश सरकार ने दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाया, विधवाओं को पेंशन दी और प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाई। कांग्रेस को सिर्फ वोट बैंक की चिंता है, जबकि नीतीश कुमार विकास और न्याय की राजनीति कर रहे हैं। सेक्युलरिज्म कांग्रेस के लिए नारा है, ना उनको देश से मतलब है, न मुस्लमानों से मतलब है। उनको अपने वोट की चिंता रहती है। नीतीश कुमार काम करते हैं इसलिए कांग्रेस पार्टी और जयराम रमेश का बयान देखा है उनके भी सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं। वहीं जब उनसे जब दोबारा पूछा गया कि आपकी पार्टी का वक्फ संशोधन विधेयक पर क्या स्टैंड है तो उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी जो करेगी लोकसभा में करेगी।