बिहार के पूर्णिया में युवती को शराब पिलाकर छह लोगों द्वारा कथित तौर पर गैंगरेप (Purnia Gangrape Case) किए जाने की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जघन्य वारदात पर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अमानवीय और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाया जाना चाहिए और दोष सिद्ध होने पर उन्हें फांसी जैसी कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में एक सख्त संदेश जाए।
पप्पू यादव ने इस घटना को किसी एक जिले तक सीमित न मानते हुए इसे बिहार में बढ़ते अपराधों की श्रृंखला का हिस्सा बताया। उन्होंने खगड़िया में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, पटना में होस्टल में बच्चियों के साथ यौन शोषण और जहानाबाद में बलात्कार के बाद हत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिलसिला दर्शाता है कि राज्य में अपराधियों का मनोबल किस हद तक बढ़ चुका है। उनके अनुसार, जब मासूम बच्चियों तक सुरक्षित नहीं हैं, तो यह व्यवस्था की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
सांसद ने शराब को भी इन अपराधों की एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि पूर्णिया की घटना में युवती को पहले शराब पिलाई गई, फिर उसे करीब 25 किलोमीटर तक ले जाकर वारदात को अंजाम दिया गया और उसके बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई। यह दर्शाता है कि अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं रह गया है और उन्हें भरोसा है कि वे आसानी से बच निकलेंगे। पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में अपराधियों पर कानून का इकबाल लगभग खत्म हो चुका है, जो बेहद खतरनाक संकेत है।
उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में कई सांसद ऐसे हैं जो सांसद निधि के फंड का उपयोग विकास कार्यों में नहीं कर पाए हैं, जो उनकी निष्क्रियता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। उनके अनुसार, जब जनप्रतिनिधि विकास और सुरक्षा जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान नहीं देंगे, तो आम जनता को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
वहीं, लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के सवाल पर पप्पू यादव ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह अदालत का निर्णय है और इसमें किसी को भी अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब देश में कई अन्य नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, तो केवल लालू यादव के मामले में ही इतनी ज्यादा राजनीतिक और मीडिया हलचल क्यों मचती है। उनके इस बयान को न्याय और समानता की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।






















