Kishanganj News: भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश की सीमाओं से सटे बिहार के किशनगंज जिले में एक बार फिर पहचान से जुड़ी साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड यानी UP ATS की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बॉर्डर बेल्ट में चल रहा आईडी फ्रॉड अब केवल स्थानीय अपराध नहीं रहा, बल्कि यह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के मुंशीभीट्टा गांव में हुई इस कार्रवाई ने फर्जी आधार कार्ड नेटवर्क की उस परत को उघाड़ दिया है, जिसे लंबे समय से खामोशी के साथ पनपाया जा रहा था।
UP ATS की चार सदस्यीय विशेष टीम ने बिहार पुलिस के सहयोग से एक युवक को हिरासत में लिया, जिसकी पहचान अरमान के रूप में हुई है। आरोप है कि वह अवैध रूप से आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र बनाने वाले गिरोह का सक्रिय हिस्सा था। जिस दुकान से उसे पकड़ा गया, वह बाहर से मामूली दिखती थी, लेकिन अंदर डिजिटल पहचान से जुड़े खतरनाक खेल का पूरा सेटअप मौजूद था। लैपटॉप, थंब स्कैनर, प्रिंटर और संदिग्ध दस्तावेजों की बरामदगी ने एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
इस कार्रवाई को सामान्य गिरफ्तारी के तौर पर नहीं देखा जा रहा। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े नेटवर्क की कड़ी मान रही हैं, जिसके तार सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं हो सकते। ATS सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी लंबे समय से फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहा था और उसके संपर्क में कई ऐसे लोग थे, जिनकी पहचान और गतिविधियां संदिग्ध हैं। इसी वजह से आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश ले जाया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है।
किशनगंज की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद संवेदनशील बनाती है। यह जिला न केवल दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब है, बल्कि लंबे समय से अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध आवाजाही को लेकर चर्चा में रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा खतरा यही है कि फर्जी आधार या अन्य पहचान पत्रों के जरिए कोई भी व्यक्ति देश के भीतर आसानी से अपनी पहचान बदल सकता है। यही वजह है कि ID फ्रॉड को अब सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए सीधा खतरा माना जा रहा है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। कुछ दिन पहले गलगलिया थाना क्षेत्र से भी फर्जी आधार से जुड़ा मामला सामने आया था। इससे पहले जियापोखर इलाके में भी एक पूरे रैकेट का खुलासा हुआ था, जिसके तार बांग्लादेशी घुसपैठियों से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सीमा से सटे इलाकों में डिजिटल पहचान प्रणाली का दुरुपयोग सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।
ATS और बिहार पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी अरमान ने अब तक कितने लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और वे दस्तावेज किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए गए। एजेंसियों की नजर इस पर भी है कि क्या इस नेटवर्क का इस्तेमाल केवल अवैध घुसपैठ के लिए हो रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित या आतंकी उद्देश्य भी छिपा है। बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।






















