बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद में अब लीडरशिप चेंज (RJD Leadership Change) होने की संभावना जताई जा रही है. RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को होने जा रही है. पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी यादव को RJD का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है. इस फैसले पर अंतिम मुहर RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य लगाएंगे. इसको लेकर जदयू भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रिया जताई है.
भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा ने कहा, तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा रहा है. वो तो पार्टी के मालिक हैं. वो अपने को अध्यक्ष कहें, कार्यकारी अध्यक्ष कहें, राष्ट्रीय अध्यक्ष कहें, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष कहें, सब वही हैं. राजद परिवारवादी पार्टी है, प्राइवेट लिमिटेड पार्टी है, परिवार की पार्टी है. इस देश के अंदर इस समय जितनी राजनीतिक दल हैं, एक भारतीय जनता पार्टी को छोड़ दीजिए, तो किसी पार्टी में कोई लोकतांत्रिक मूल्य तो है नहीं. जिन्होंने पार्टी की स्थापना की और आज तक उस पर कब्जा बनाए हुए हैं. जहां तक भाजपा की बात है, क्या आपको पता था कि जेपी नड्डा जी के बाद नितिन नवीन जी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. मीडिया को भी मालूम नहीं था. ये भाजपा के लोकतांत्रिक मूल्य हैं.
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कांग्रेस के एमएलसी समीर सिंह ने कहा, लालूजी अध्यक्ष हैं,. पार्टी के लोग उनको सम्मान देने के लिए अध्यक्ष बनाए रखने के पक्ष में रहते हैं, लेकिन बरसों से तो तेजस्वी यादव ही नेतृत्व कर रहे हैं. इसलिए कोई नई बात नहीं होगी, अगर उनको कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है तो. नेतृत्व तो अभी उन्हीं का है और लालूजी भी मानते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल का नेतृत्व तेजस्वी यादव के हाथ में है.
समीर सिंह ने कहा कि पार्टी में अगर नया नेतृत्व और युवा नेतृत्व को स्थापित किया जा रहा है, यह अच्छी बात है. भारतीय जनता पार्टी ने भी ऐसा किया कि एकदम नए लड़के को लाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया. उसी तरह से ये तो कम से कम प्रतिपक्ष के नेता और डिप्टी चीफ मिनिस्टर, यानी उनसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहे हैं अपने दल में. इसलिए कोई अस्वाभाविक बात नहीं है. यह स्वाभाविक प्रक्रिया है. आज नहीं तो कल यह होना ही था.
इस बारे में जेडीयू के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता निहोरा यादव ने कहा, आरजेडी में यही होना ही था. तेजस्वी का जिस प्रकार हर मामले में हस्तक्षेप और परिवार को अलग करना, ये ‘पावर ग्रैब’, पार्टी पर भी कब्जा करने की साजिश इनकी चल रही थी. ये नहीं समझ पा रहे हैं कि लालू यादव जी को किनारे करके, मुझको नहीं लगता है कि पार्टी मजबूत होगी. पार्टी और गर्त में ही जाएगी.






















