बिहार की राजधानी आने वाले दिनों में सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बनने जा रही है। 11 अप्रैल को कांग्रेस सीएम आवास का घेराव करने जा रही है, और इसकी अगुवाई करेंगे युवा नेता कन्हैया कुमार, जो पिछले कई दिनों से राज्य में ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ यात्रा निकाल रहे हैं। ये आंदोलन अब अपने चरमोत्कर्ष पर है — और पटना में इसके समापन के साथ एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन तय है।
5 हजार कार्यकर्ताओं के साथ होगा प्रदर्शन, CM आवास के घेरे की तैयारी पूरी
राजधानी पटना के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कांग्रेस इस बार सीधा मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करेगी। करीब 5000 कार्यकर्ता इस अभियान में शामिल होंगे, और इसकी रणनीति बेहद सुनियोजित ढंग से तैयार की गई है। 10 अप्रैल को सदाकत आश्रम में 3 से 4 हजार कार्यकर्ताओं को रुकवाया जाएगा, जो अगले दिन यानी 11 अप्रैल को कन्हैया कुमार के साथ सीएम हाउस की ओर कूच करेंगे।
कन्हैया कुमार की यात्रा का अंतिम पड़ाव — ‘पलायन और बेरोजगारी’ पर आर-पार की लड़ाई
बेगूसराय से शुरू हुई कन्हैया कुमार की यह यात्रा बिहार की जमीनी हकीकत को सामने लाने का प्रयास रही है। ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि बेरोजगारी की चुभती सच्चाई पर सियासी प्रहार है। कन्हैया कुमार का कहना है कि “बिहार के नौजवान घर छोड़ने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकार ने रोजगार के नाम पर सिर्फ वादे किए, काम नहीं।”
यह यात्रा अब 11 अप्रैल को पटना में समाप्त होगी, और कांग्रेस इसे बेरोजगारों की आवाज की जीत के रूप में प्रचारित कर रही है।
इस आंदोलन को कांग्रेस आलाकमान का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। 7 अप्रैल को राहुल गांधी खुद बिहार दौरे पर आ रहे हैं। वह कन्हैया की यात्रा में शामिल होंगे — पहले बेगूसराय, फिर पटना के कार्यक्रम में भाग लेंगे।
सूत्रों का कहना है कि 11 अप्रैल के प्रदर्शन में राजस्थान के कांग्रेस विधायक सचिन पायलट भी भाग ले सकते हैं। यह उपस्थिति कांग्रेस की इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।