बिहार में हालिया विधानसभा चुनावों (Bihar Election Petitions) के बाद राजनीतिक संघर्ष अब अदालत के दरवाजे पर पहुँच गया है। राज्य के चार महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों नरपतगंज, मधुबनी, मोहिउद्दीननगर और टेकारी के चुनाव परिणामों को हार चुके प्रत्याशियों ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इन याचिकाओं ने न सिर्फ चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते अविश्वास और तीखी प्रतिस्पर्धा को भी उजागर किया है।
सबसे पहले नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र के परिणाम ने विवाद की आग को हवा दी, जहाँ राजद उम्मीदवार मनीष यादव ने भाजपा की विजयी विधायक देवयंती यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। मनीष यादव का दावा है कि मतदान और मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ियों की अनदेखी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप निर्वाचन की निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है। न्यायमूर्ति शशि भूषण प्रसाद सिंह की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नवनिर्वाचित विधायक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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मधुबनी विधानसभा क्षेत्र की कहानी भी कुछ इसी तरह की है, जहाँ राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार गणेश कुमार महरान ने सरकते अंतर और कथित अनियमितताओं को आधार बनाते हुए रालोमो विधायक माधव आनंद के निर्वाचन को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय की पीठ ने इस मामले में भी नोटिस जारी कर विधायक से विस्तृत जवाब मांगा है। चुनावी परिणामों पर सवाल उठाने का यह क्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि मतगणना के हर चरण में पारदर्शिता की माँग अब पहले से अधिक मजबूत हो चुकी है।
मोहिउद्दीननगर में राजद उम्मीदवार डॉ. इज्या यादव ने भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह की जीत पर सवाल उठाते हुए चुनाव याचिका दायर की है। उनका कहना है कि मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं और प्रक्रियागत चूकों ने चुनावी परिणाम को प्रभावित किया। इस मामले की सुनवाई आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की ओर से की जानी है, जो इस क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है।
इसी तरह टेकारी विधानसभा क्षेत्र से हम प्रत्याशी डॉ. अनील कुमार ने राजद विधायक अजय कुमार के निर्वाचन को चुनौती देते हुए दावा किया है कि कई बूथों पर मतदाताओं की पहचान और मतगणना से संबंधित खामियों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से समझौता बताते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है। चारों मामलों में अधिवक्ता अवनीश कुमार ने याचिकाएं दाखिल की हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी चुनौती को लेकर कानूनी तैयारी भी बेहद संगठित और रणनीतिक रूप से हुई है।


















