बिहार में जनवरी की शुरुआत ने ही मौसम (Bihar Weather Update) का रुख ऐसा मोड़ा है कि पूरा राज्य ठंड, शीत लहर और कोल्ड-डे स्थितियों से प्रभावित दिखाई दे रहा है। पछुआ हवाओं की लगातार दस्तक ने तापमान को नीचे धकेल दिया है और आम जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सुबह और देर रात घने कोहरे की वजह से सड़कें धुंधली हो जा रही हैं और दृश्यता इतनी कम हो रही है कि वाहन चालकों और पैदल यात्रियों दोनों के लिए रास्ता तय करना जोखिम भरा साबित हो रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह स्थिति 10 जनवरी तक जारी रह सकती है और ठंड से फिलहाल राहत की संभावना नहीं दिख रही।

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में ठंड की तीव्रता महसूस की गई। सुबह 10 बजे तक कई इलाकों में इतना घना कोहरा छाया रहा कि लोग घरों से बाहर निकलने में असहज नजर आए। बक्सर, मुंगेर, छपरा, पटना, फारबिसगंज, सहरसा, दरभंगा और अरवल जैसे जिलों में कोल्ड-डे की स्थिति बनी रही, जबकि छपरा में शीत लहर का असर देखने को मिला। तापमान की दृष्टि से शेखपुरा में अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ जबकि सबसे कम तापमान भागलपुर के सबौर में 5 डिग्री तक लुढ़क गया। कोहरे की घनता इतनी अधिक रही कि कई स्थानों पर विजिबिलिटी सिर्फ 40 मीटर पर आ गई, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया।
मौसम विभाग के अनुसार 10 जनवरी को भी बिहार के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में शीत दिवस की स्थिति बनी रह सकती है। पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा में घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। इन जिलों में सुबह-सुबह दृश्यता बेहद कम रह सकती है, जिससे यात्रा प्रभावित होने की संभावना है। राज्य के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान 16 से 18 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8 से 10 डिग्री रहने का अनुमान है, जबकि दक्षिण-पूर्वी बिहार के कुछ जिलों में न्यूनतम तापमान 6 से 8 डिग्री तक गिर सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, हालांकि इसके बाद 48 घंटों के भीतर तापमान में 1 से 3 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन तापमान में यह हल्की बढ़ोतरी ज्यादा देर टिकने की संभावना नहीं है, क्योंकि फिर से ठंड बढ़ने और कोहरा बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में बिहारवासियों को अभी कुछ दिनों तक ठिठुरन और कम दृश्यता से जूझना पड़ सकता है, जबकि सरकार और प्रशासन भी अलर्ट मोड में है ताकि आपदा जैसी स्थिति न बने।






















