बिहार कांग्रेस (Bihar Congress) मुख्यालय में आयोजित जिला प्रेवेक्षकों की अहम बैठक ने प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कांग्रेस की सक्रियता और संगठनात्मक मंशा को साफ कर दिया है। बैठक की अध्यक्षता बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने की, जिसमें राज्य के सभी जिलों से आए प्रेवेक्षक शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य सिर्फ समीक्षा नहीं बल्कि जमीनी हकीकत को समझते हुए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की ठोस योजना तैयार करना रहा।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में राजेश राम ने स्पष्ट किया कि यह सभी जिला प्रभारियों की समीक्षा बैठक है। उन्होंने बताया कि जिला प्रेवेक्षक पहले अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं और इसके बाद दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट दी गई थी। अब दोबारा जिला स्तर पर जाकर प्रखंड और जिला स्तर पर संगठनात्मक काम को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य यह जानना है कि किस जिले में पार्टी मजबूत है और कहां कमजोर, ताकि उसी के अनुसार रणनीति बनाकर संगठन को पुनर्जीवित किया जा सके।
राजेश राम ने इस बात पर जोर दिया कि जिला कांग्रेस कमेटी और प्रखंड कांग्रेस कमेटी को पूरी तरह से रिवाइवल करना पार्टी की प्राथमिकता है। संगठन को कैसे मजबूत किया जाए, बूथ से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं को कैसे सक्रिय किया जाए, इसी दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जब तक जमीनी संगठन मजबूत नहीं होगा, तब तक बिहार की राजनीति में प्रभावी हस्तक्षेप संभव नहीं है।
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राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में मची टूट और राज्यसभा चुनाव की राजनीति पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी दोनों मोर्चा खोले हुए हैं और यह पूरी तरह से प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह दबाव की राजनीति भारतीय जनता पार्टी पर काम नहीं करेगी।
राजेश राम ने यह भी आरोप लगाया कि ये दोनों पार्टियां बीजेपी की कृपा पर टिकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कृपा के पात्र होते हैं, वही जाकर अपनी मांग रखते हैं और यही उनका राजनीतिक काम है। राज्यसभा को लेकर उनकी सक्रियता को उन्होंने निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़ते हुए कहा कि यह सब उसी का हिस्सा है।






















