बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Chunav 2025) के पहले चरण के प्रचार का शोर अब थम चुका है। प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद अब प्रत्याशी अपने चुनावी खर्च का ब्योरा समाहरणालय में जमा कर रहे हैं। इन ब्योरे से यह साफ हो गया है कि किस उम्मीदवार ने प्रचार के लिए सबसे अधिक पैसा खर्च किया और कौन सबसे किफायती साबित हुआ।
पटना जिले से मिले अब तक के आंकड़ों के अनुसार, फतुहा विधानसभा क्षेत्र के राजद प्रत्याशी डॉ. रामानंद यादव ने सबसे अधिक 17.56 लाख रुपए चुनाव प्रचार में खर्च किए हैं। वहीं, मनेर से राजद के भाई वीरेंद्र ने केवल 3.49 लाख रुपए खर्च कर खुद को सबसे कम खर्च करने वाले प्रत्याशी के रूप में दर्ज कराया है। जबकि चुनाव आयोग ने प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 40 लाख रुपए की खर्च सीमा तय की है।
जिला प्रशासन के अनुसार, पटना जिले के सभी प्रत्याशियों ने मंगलवार तक अपने चुनावी खर्च का ब्योरा व्यय कोषांग में जमा कर दिया है। इन ब्योरे की जांच के बाद आज अंतिम रिपोर्ट जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
अगर हम सीटवार नजर डालें तो कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। दानापुर से भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव का खर्च 13.26 लाख रुपए दर्ज किया गया है, जबकि मोकामा से जदयू के अनंत सिंह ने 10.84 लाख रुपए खर्च किए हैं। बाढ़ से राजद के कर्णवीर सिंह यादव ने 12.71 लाख रुपए, वहीं बख्तियारपुर से लोजपा (आर) के अरुण कुमार ने 4.12 लाख रुपए खर्च किए।
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दीघा विधानसभा में मुकाबला दिलचस्प रहा—जन सुराज के रीतेश रंजन सिंह (बिट्टू) ने 14.36 लाख रुपए, जबकि भाजपा के डॉ. संजीव चौरसिया ने 9.11 लाख रुपए खर्च का ब्योरा दिया है। बांकीपुर से नितिन नवीन ने 8.06 लाख रुपए, कुम्हरार से कांग्रेस के इंद्रदीप चंद्रवंशी ने 8.08 लाख रुपए, और पटना साहिब से शशांत शेखर ने 9.05 लाख रुपए खर्च किए।
मसौढ़ी से राजद की रेखा देवी ने 13.68 लाख रुपए, बिक्रम से भाजपा के सिद्धार्थ सौरभ ने 5.89 लाख रुपए, पालीगंज से लोजपा (आर) के सुनील कुमार ने 7.06 लाख रुपए, और भाकपा माले के संदीप सौरभ ने 4.42 लाख रुपए खर्च की जानकारी दी है। वहीं फुलवारी से जदयू के श्याम रजक ने 7.91 लाख रुपए का खर्च बताया।
जिला प्रशासन के अनुसार, सभी उम्मीदवारों को न केवल ऑफलाइन बल्कि ऑनलाइन पोर्टल पर भी अपने खर्च का विवरण अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। प्रशासन की टीम पूरे अभियान अवधि में खर्च की निगरानी करती रही—फ्लाइंग स्क्वॉड, वीडियो सर्विलांस टीम और एक्सपेंडिचर मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट्स के आधार पर इन खर्चों का अनुमान और सत्यापन किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि इन सभी विवरणों को समेकित कर अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी, जो आम जनता और निर्वाचन आयोग दोनों के लिए उपलब्ध रहेगी। यह रिपोर्ट चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करेगी।






















