साल 2025 के समापन पर बिहार की राजनीति में पारदर्शिता और संपत्ति के सवाल एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के मंत्रियों (Bihar Ministers Assets) ने वर्ष के अंतिम दिन अपनी चल-अचल संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा किया, जिसने सत्ता और साधनों के बीच के फर्क को साफ तौर पर सामने ला दिया। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि उनकी कुल चल संपत्ति 17 लाख 66 हजार 196 रुपये है। सादगी की इस घोषणा के बाद नजरें कैबिनेट के अन्य मंत्रियों पर टिकीं, जहां संपत्ति के आंकड़े कहीं चौंकाते हैं तो कहीं राजनीतिक विमर्श को नई दिशा देते हैं।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की संपत्ति पर नजर डालें तो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत दिखाई देती है। नकदी, बैंक खातों में जमा राशि, 200 ग्राम सोना, बोलेरो नियो जैसी एसयूवी और लाइसेंसी हथियार यह दर्शाते हैं कि सत्ता में रहते हुए उनके पास विविध प्रकार की चल संपत्ति है। दूसरी ओर, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के बैंक खातों में जमा 55 लाख से अधिक की राशि और लगभग दस लाख रुपये मूल्य के स्वर्णाभूषण उनकी वित्तीय स्थिरता को दर्शाते हैं।
बीजेपी की मंत्री रमा निषाद की संपत्ति का आंकड़ा सबसे अधिक चौंकाने वालों में शामिल है। करीब 3.75 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति, दो किलो सोना, छह किलो चांदी और भारी निवेश यह बताता है कि ग्रामीण राजनीति से निकली यह नेता अब आर्थिक रूप से बेहद मजबूत स्थिति में हैं। वहीं मंगल पांडे के खातों में एक करोड़ से ज्यादा की राशि, सोना और हथियार यह संकेत देते हैं कि लंबे समय से सत्ता में रहने का सीधा असर उनके वित्तीय ग्राफ पर दिखता है।
जदयू के मंत्री मदन सहनी का मामला थोड़ा अलग है। जहां एक ओर उनके ऊपर 40 लाख रुपये का कर्ज है, वहीं दूसरी ओर दो करोड़ से अधिक मूल्य की गैरकृषि भूमि और तीन महंगी गाड़ियां उनकी संपत्ति को संतुलित करती हैं। सुनील कुमार की स्थिति भी दिलचस्प है, जिनके पास कार नहीं है लेकिन एक लाइसेंसी रिवॉल्वर और बैंकों में एक करोड़ 60 लाख से अधिक का निवेश है, जो यह दिखाता है कि संपत्ति का स्वरूप सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं होता।
लेशी सिंह पर दर्ज 43 लाख से ज्यादा का कर्ज यह बताता है कि सभी मंत्री केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि देनदारियों के साथ भी सार्वजनिक जीवन जी रहे हैं। वहीं बीजेंद्र यादव के बैंक खातों में जमा दो करोड़ से अधिक की राशि और सीमित नकदी एक अलग आर्थिक प्रोफाइल पेश करती है। विजय चौधरी की संपत्ति में खेतिहर भूमि का होना यह दर्शाता है कि कृषि आधारित निवेश अभी भी बिहार के नेताओं के लिए अहम है।
एलजेपी (रामविलास) के मंत्री संजय सिंह की संपत्ति में सोने के आभूषण, दो हथियार और पटना में दो मकान शामिल हैं, जो शहरी संपत्ति के बढ़ते चलन की ओर इशारा करते हैं।






















