बिहार विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन तीखी राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच बेहद गरम रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सरकार पर जोरदार हमला बोला, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी पलटवार करते हुए विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया। सदन में दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग ने बिहार की राजनीति में जारी वैचारिक संघर्ष को खुलकर सामने ला दिया।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार की पहचान दो बातों से होती है—एक झूठी वाहवाही और दूसरी पूरी लापरवाही। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है और सत्ता पक्ष जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने में लगा है। तेजस्वी ने राज्यपाल के अभिभाषण को भी सरकार की उपलब्धियों का एकतरफा चित्रण बताते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
राज्यपाल के धन्यवाद प्रस्ताव पर नीतीश कुमार का तीखा पलटवार.. डांटने लगे तेजस्वी यादव को- बैठो जी !
इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और कहा कि ‘जंगलराज’ का दौर बिहार की जनता भूली नहीं है। उन्होंने बिना नाम लिए राजद पर हमला करते हुए कहा कि जिन लोगों का इतिहास भ्रष्टाचार और अराजकता से जुड़ा रहा है, उन्हें सरकार को सीख देने का अधिकार नहीं है। विजय सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ‘विकसित बिहार’ के लक्ष्य की बात करते हुए दावा किया कि राज्य में विकास की मजबूत नींव रखी जा चुकी है।
सदन में राजनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब विजय सिन्हा ने विपक्ष के अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार ने जंगलराज का दौर देखा है और एनडीए सरकार ने उस अराजकता को समाप्त करने का काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता ने विपक्ष की पुरानी राजनीति को नकार दिया है और अब केवल ‘भौकाल’ से व्यवस्था नहीं चल सकती। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने लगातार विरोध दर्ज कराया, जिससे सदन में शोरगुल का माहौल बन गया।
वाम दल के विधायक संदीप सौरभ ने भी विजय सिन्हा के बयान पर आपत्ति जताई और खड़े होकर विरोध करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि बोलने का अवसर मिलने पर ही सदस्य अपनी बात रखें।






















