बिहार विधानसभा (Bihar Vidhansabha) के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में एक ऐतिहासिक और सौहार्द्रपूर्ण क्षण देखने को मिला, जब सर्वसम्मति से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और गया शहर से नौवीं बार निर्वाचित विधायक प्रेम कुमार को विधानसभा का नया स्पीकर चुन लिया गया। उनके निर्विरोध स्पीकर चुने जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सभी दलों के नेताओं ने शुभकामनाएँ दीं। इस चयन को बिहार की राजनीति में नए संतुलन और सहयोग की तरफ बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।
स्पीकर पद पर चयन के बाद प्रेम कुमार ने धन्यवाद देते हुए कहा कि वे सदन को निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से संचालित करने की पूरी कोशिश करेंगे। उनकी शांत छवि और लंबे संसदीय अनुभव को देखते हुए राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की बेहतर पुल बन सकते हैं।
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लेकिन स्वागत भाषण के दौरान सदन में एक अलग ही भावनात्मक और विचारोत्तेजक पहलू देखने को मिला, जब AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने नया दृष्टिकोण रखते हुए निष्पक्षता की परिभाषा पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रेम कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उनका नौवीं बार जीतकर आना जनता के भरोसे का प्रमाण है, लेकिन साथ ही चेताया कि इस समय बिहार में विपक्ष बेहद कमजोर स्थिति में है और सत्ता पक्ष के पास अत्यधिक संख्या बल है। ऐसे में स्पीकर की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
ईमान ने प्रसिद्ध कथाकार प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पंच की कुर्सी पर बैठने वाला व्यक्ति अपना और पराया नहीं देखता, केवल न्याय को देखता है। उन्होंने कहा कि आज समाज में नैतिकता का पतन सबसे बड़ी चुनौती बन गया है और सच्चाई का साथ देने की जरूरत है। ईमान ने कहा कि समाज में तीन प्रकार के लोग होते हैं- पक्षधर, विपक्षी और निष्पक्ष, जिनमें निष्पक्ष सबसे कायर साबित होते हैं, क्योंकि वे सत्य का साथ देने से बचते हैं। उन्होंने स्पीकर से आशा जताई कि वे सत्य के पक्षधर बनकर बिहार को नई दिशा देंगे।






















