दिल्ली की जहरीली हवा (Delhi Pollution Debate) एक बार फिर संसद के भीतर तीखी राजनीतिक बहस का कारण बन गई है। शुक्रवार को वायु प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखे। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे पर बहस शुरू करने के बाद भी विपक्षी दलों ने सदन में अराजकता और भ्रम की स्थिति पैदा की। उनका आरोप था कि इसी शोरगुल के कारण कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को भी अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल सका, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
रिजिजू के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया। इस मुद्दे पर जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कांग्रेस की आंतरिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर दिया गया है, जबकि वे अपने अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेहतर तरीके से बात रख सकते हैं। राजीव रंजन का कहना था कि अगर प्रियंका गांधी केवल इसलिए निशाने पर आ रही हैं क्योंकि वे प्रभावी ढंग से अपनी बात रखती हैं और यह स्थिति राहुल गांधी की नीतियों से जुड़ी है, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आत्ममंथन करना चाहिए कि वे मौजूदा हालात में पार्टी के साथ बने रहें या नहीं।
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संसद के भीतर चल रही इस खींचतान के बीच कांग्रेस नेता तारिक अनवर का बयान भी सामने आया, जिसने बहस को विदेश नीति तक पहुंचा दिया। उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के उस सवाल का समर्थन किया, जिसमें बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाओं का जिक्र किया गया था। तारिक अनवर ने कहा कि बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और उसके निर्माण में भारत की ऐतिहासिक भूमिका रही है। ऐसे में यदि वहां किसी धर्म विशेष के खिलाफ या भारत विरोधी भावनाएं पनप रही हैं तो यह बेहद चिंताजनक है और इस मामले को भारत सरकार तथा विदेश मंत्रालय को गंभीरता और सख्ती से देखना चाहिए।






















