पटना जिले के बाढ़ इलाके में दुलारचंद यादव (Dularchand Yadav) को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दी। बाढ़ स्टेशन के समीप स्थित उनके आवास के पास आयोजित न्याय महासभा में हजारों की संख्या में लोग जुटे और दिनदहाड़े हुई उनकी हत्या के मामले में ठोस कार्रवाई की मांग की। सभा का माहौल भावनात्मक भी था और आक्रोशपूर्ण भी, जहां लोगों ने साफ कहा कि यदि इस मामले में न्याय नहीं मिला तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल होगा।

जनसभा के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई थी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि प्रशासन स्थिति की गंभीरता को भली-भांति समझ रहा है। इस न्याय महासभा का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता गगन यादव और बिहार के संतोष यादव ने किया, जिन्होंने मंच से न्याय की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की बात कही।
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सभा को संबोधित करते हुए संतोष रेणू यादव ने कहा कि दुलारचंद यादव की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह सत्ता, चुनाव और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार लगातार पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ हाई प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता की चर्चा है, इसलिए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हिंसक घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके।
दरअसल, दुलारचंद यादव की मौत बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी, जब वे जनसुराज प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी के प्रचार अभियान से जुड़े थे। इसी दौरान अनंत सिंह और पियूष प्रियदर्शी के काफिलों के बीच टकराव हो गया था। इस भिड़ंत में कई लोग घायल हुए थे और कई वाहनों के शीशे टूट गए थे। घटनाक्रम के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन दुलारचंद यादव की मौत को लेकर उठे सवाल आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।






















