गया जी के शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र में निजी मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम ने उस वक्त राजनीतिक और प्रशासनिक मायने पकड़ लिए, जब बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) मंच से सीधे कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान करते नजर आए। यह सिर्फ एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए बिहार की सुरक्षा, विकास और सुशासन की दिशा को परिभाषित करने वाला बयान था, जो गूगल ट्रेंड्स और सर्च में जगह बनाने की पूरी क्षमता रखता है।
उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है और यह जिम्मेदारी किसी पद का नहीं, बल्कि मिशन की तरह है। उनका एकमात्र लक्ष्य बिहार से अपराध, माफिया और अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने कहा कि सुशासन सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली व्यवस्था होनी चाहिए और इसके लिए सरकार बिना किसी दबाव के कार्रवाई कर रही है।
सम्राट चौधरी ने संकेत दिए कि राज्य में चल रहा सफाई अभियान अस्थायी नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी अपराधी या माफिया ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है तो वे आवेदन दें। प्रशासन 24 घंटे के भीतर अतिक्रमण को ध्वस्त करेगा। इस बयान ने साफ कर दिया कि सरकार अब शिकायतों को फाइलों में दबाने के बजाय त्वरित कार्रवाई के मॉडल पर काम कर रही है।
रोजगार को लेकर उन्होंने ऐसा बयान दिया जो सीधे युवाओं की उम्मीदों से जुड़ता है। सम्राट चौधरी ने कहा कि अब बिहार का कोई बच्चा रोजगार के लिए बाहर नहीं जाएगा। आने वाले पांच वर्षों में ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी कि युवाओं को अपने ही राज्य में नौकरी और अवसर मिलें। यह संदेश उन लाखों परिवारों के लिए राहत की तरह है, जिनके बच्चे रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में भटकने को मजबूर हैं।
महिलाओं की सुरक्षा पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि गर्ल्स स्कूल और महिला कॉलेजों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बहनों से छेड़छाड़ करने वालों के लिए कोई माफी नहीं होगी और उनकी जगह सीधा गया जी की जेल होगी। यह बयान कानून के डर और सामाजिक सुरक्षा दोनों को मजबूत करने की रणनीति का संकेत देता है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर सम्राट चौधरी का रुख सबसे कड़ा नजर आया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के अनुसार 31 मार्च 2026 तक बिहार को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाना है। बचे हुए नक्सलियों के पास दो ही रास्ते होंगे, या तो आत्मसमर्पण कर जेल जाएं या फिर कानून के तहत उनका अंत तय होगा। यह बयान बताता है कि राज्य सरकार अब इस समस्या को टालने के बजाय निर्णायक समाधान की ओर बढ़ रही है।






















