बिहार में बढ़ते अपराध और हालिया घटनाओं को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच जदयू के सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर (JDU MP Devesh Chandra Thakur) ने कानून-व्यवस्था पर बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि जब अपराधी किसी भी तरह कानून मानने को तैयार नहीं हैं, तब गंभीर अपराधों को रोकने का एकमात्र प्रभावी तरीका एनकाउंटर ही बचता है। सांसद ने कहा कि पुलिस को ऐसे आरोपियों को पकड़कर उनका एनकाउंटर करना चाहिए, क्योंकि समाज में डर का माहौल तभी बनता है जब अपराधियों को उनके कृत्य की सख्त सजा मिले।
सांसद देवेश चंद्र ठाकुर पटना में हुए ताज़ा एनकाउंटर का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि रोज नई घटनाएँ सामने आ रही हैं। उन्होंने सीतामढ़ी में हुए गैंगरेप को लेकर भी बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ऐसे मामलों में अपराधियों को कानून की प्रक्रिया में उलझाने की बजाय सीधे एनकाउंटर ही सबसे बड़ा जवाब है। उनके अनुसार, आम जनता तभी अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगी जब अपराधियों में डर का माहौल हो।
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उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा ‘गुंडा बैंक’ बंद करने के निर्देश पर भी सांसद ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीति के तहत यह कदम उठाया गया है और किसी भी तरह की गलत गतिविधि पाई जा रही है तो उसे बंद करना ही चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपमुख्यमंत्री की बात में कोई गलत संदेश नहीं है और सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर पूरी तरह गंभीर है।
सीतामढ़ी में एचआईवी/एड्स के 7400 मामलों की चर्चा पर सांसद ने कहा कि यह संख्या अचानक नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेने पर पता चला कि यह कई वर्षों का संयुक्त आंकड़ा है, जिसे गलत तरीके से वर्तमान स्थिति के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भ्रम फैलाने की बजाय वास्तविक आंकड़ों और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
इसके साथ ही सांसद ने राहुल गांधी के “वोट चोरी” संबंधी आरोपों को भी पुराना और अप्रासंगिक बताया। उनका कहना है कि बिहार में ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है और राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को बार-बार उठाना व्यर्थ है। उन्होंने दावा किया कि यह एक “बेकार का विषय” है जिसे बिना आधार के बार-बार चर्चा में लाया जा रहा है।
शिवानंद तिवारी द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव पर लगाए गए आरोपों पर भी सांसद ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस सवाल का जवाब तेजस्वी यादव को स्वयं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में जवाबदेही महत्वपूर्ण है और जनता भी यह जानना चाहती है कि हार के बाद राज्य से बाहर जाने की क्या मजबूरी थी।






















