तमिलनाडु के कृषि मंत्री एम.आर.के. पनीरसेल्वम (M.R.K. Panneerselvam) ने हाल ही में उत्तर भारतीय प्रवासियों (खासकर बिहार और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों से आने वाले मजदूरों) पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीय तमिलनाडु में सिर्फ “टेबल क्लीनर” (मेज साफ करने वाले) और “पानी पूरी बेचने” जैसे कामों के लिए आते हैं, क्योंकि उनके पास हिंदी के अलावा कोई अन्य स्किल नहीं है और उनके घरेलू राज्यों में रोजगार के अवसर कम हैं।
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यह बयान तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे प्रवासियों के खिलाफ अपमानजनक और विभाजनकारी करार दिया है।स पर बिहार सरकार के मंत्री लखेंद्र पासवान ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा:बिहार के लोग मेहनतकश हैं और अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करते। ‘एक बिहारी सौ पर भारी’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि बिहारियों की क्षमता, संस्कार और आत्मसम्मान की पहचान है।”
लखेंद्र पासवान ने बिहार के लोगों की मेहनत, योगदान और गरिमा पर जोर देते हुए कहा कि प्रवासी बिहारी मजदूर देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी मेहनत से अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं, और ऐसे बयानों से उनका अपमान अस्वीकार्य है।






















